राज्य की प्रोटोकॉल नियमावली में बदलाव

मायावती
Image caption मुख्यमंत्री मायावती और कांग्रेस के बीच बढ़ती दूरियों ने राज्य से आने वाले केंद्र के मंत्रियों को साईकिल पर चलने के लिए मजबूर कर दिया.

उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार और केंद्र की कांग्रेस सरकार में बढ़ रही राजनीतिक तल्ख़ी के नतीजे सामने आने लगे हैं.

अब केंद्र सरकार के मंत्रियों को प्रोटोकॉल या शिष्टाचार सुविधाओं से वंचित होकर लालबत्ती वाली एंबेसेडर कार की बजाए साइकिल रिक्शा पर चलना पड़ रहा है क्योंकि प्रदेश की मायावती सरकार ने प्रोटोकॉल नियमावली बदल डाली है.

कांग्रेस पार्टी के लोग सोमवार को उस समय अचम्भे में पड़ गए जब झांसी से लोक सभा सदस्य और केंद्र सरकार में ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रदीप जैन साइकिल रिक्शे पर बैठकर पार्टी कार्यालय पहुंचे.

प्रदीप जैन ने साइकिल रिक्शे की सवारी पर्यावरण संरक्षण या पेट्रोल बचाने के लिए नहीं बल्कि मजबूरी में की क्योंकि राज्य सरकार ने उन्हें पहले की तरह राज्य अतिथि का दर्जा नही दिया.

प्रोटोकॉल के तहत राज्य अतिथि का दर्जा मिलने पर सरकारी कार के अलावा राज्य अतिथि गृह में कमरा और भोजन बिना भुगतान मिलता है.

वीवीआईपी गेस्ट हाउस में प्रदीप जैन को कमरा देते समय मैनेजर ने यह भी कहा कि कमरे का किराया और भोजन का बिल भी उन्हें अपनी जेब से चुकाना पड़ेगा.

इसी तरह पेट्रोलियम राज्यमंत्री जितेन प्रसाद को भी राज्य अतिथि दर्जा न मिलने से सरकारी गाड़ी उन्हें लेने एयरपोर्ट नहीं गई.

ये दोनों केंद्रीय मंत्री मुख्यमंत्री मायावती और उनकी सरकार के कामकाज की आलोचना करते रहे हैं. समझा जाता है कि इसी कारण उन्हें राज्य अतिथि का दर्जा नही मिला.

सुविधाएँ वापस

लेकिन इसकी शुरुआत राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग के अध्यक्ष और बाराबंकी से लोक सभा सदस्य पीएल पुनिया से हुई. पुनिया रिटायर्ड आईएएस अफसर हैं और मायावती के प्रमुख रणनीतिकार रह चुके हैं.

लेकिन ताज कॉरिडोर भ्रष्टाचार मामले में उन्होंने सीबीआई जांच में मायावती के ख़िलाफ़ बयान दिया और इसलिए उनसे खटपट हो गई थी.

पिछले लोक सभा चुनाव में पुनिया कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने थे. केंद्र सरकार ने हाल ही में उन्हें राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग का अध्यक्ष बना दिया.

केंद्र सरकार ने पुनिया को कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दे दिया. लेकिन माया सरकार ने उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा देने से मना कर दिया.

माया सरकार ने इसी 12 जनवरी को 50 साल पुराना प्रोटोकॉल नियम बदल कर केंद्र के कई पदाधिकारियों को राज्य अतिथि का दर्जा उनके सामान्य अधिकार के बजाए अपने विवेकाधीन कर लिया है.

केंद्रीय कोयला राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने पत्रकारों से बातचीत में माया सरकार के इस निर्णय को अनुचित और ग़लत परम्परा बताया.

प्रदेश कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने गवर्नर बीएल जोशी से मिलकर उन्हें एक ज्ञापन दिया है और माया सरकार की कार्रवाई को असंवैधानिक बताया है.

कांग्रेस प्रवक्ता सुबोध श्रीवास्तव के अनुसार कांग्रेस पार्टी ने राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है.

राज्य सरकार का कोई अधिकारी इस मसले पर प्रतिक्रिया देने के लिए उपलब्ध नहीं था.

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