'विदेशी बैंकों में कालाधन राष्ट्र की लूट'

सुप्रीम कोर्ट
Image caption अदालत विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन को वापस लाने के लिए दायर एक याचिका की सुनवाई कर रही थी.

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों के काले धन के बारे में पूरी जानकारी मुहैया करवाने में केंद्र सरकार की आनाकानी पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अदालत ने कहा कि विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों का काला धन राष्ट्रीय संपत्ति की चोरी और राष्ट्र की लूट है.

सुप्रीम कोर्ट की बी सुदर्शन रेड्डी और एसएस निज्जर वाली पीठ ने ये टिप्पणी पूर्व क़ानून मंत्री राम जेठमालानी और अन्य की एक याचिका की सुनवाई के दौरान दी.

इस याचिका में विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों के काले धन को वापस देश लाने की प्रार्थना की गई है.

अदालत ने ये टिप्पणी तब की जब सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रामण्यम इस विषय उठाए गए सरकार के क़दमों के बारे में जानकारी दे रहे थे.

अदालत इस बात से नाख़ुश थी कि सरकार ने लिसटेनस्टीन बैंक में जमा 26 लोगों के धन के बारे में दायर हलफ़नामें में अपर्याप्त जानकारी दी है.

अदालत ने सरकार से पूछा, "क्या आपके पास यही जानकारी है या कुछ और भी है? हम बहुत अधिक धन के बारे में बात कर रहे हैं. ये राष्ट्र की लूट है. "

'पूरी जानकारी क्यों नहीं?'

Image caption ये याचिका राम जेठमलानी ने दायर की है.

अदालत को ये बात भी नहीं भाई की हलफ़नामें पर एक निदेशक स्तर के अधिकारी ने हस्ताक्षर किए हैं. सुप्रीम कोर्ट की पीठ के अनुसार हलफ़नामें वित्त सचिव के दस्तख़त होने चाहिए थे.

सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रामण्यम ने स्वीकार किया कि विदेशी बैंकों में जमा काले धन की मात्रा हैरत में डालने वाली है. उन्होंने कहा कि इस बारे में सारी जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई जा सकती क्योंकि सरकार विभिन्न देशों के साथ समझौते के आधार पर ही जानकारी दे सकती है.

अदालत ने ये सवाल भी उठाया कि सरकार सिर्फ़ लिंचेस्टीन बैंक के बारे में ही जानकारी क्यों दे रही है.

याचिकाकर्ता के वकील अनिल दीवान ने कहा कि सरकार जानकारी छिपा रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ़्ते भी काले धन के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाने में आनाकानी करने पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की थी.

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