उल्फ़ा कट्टरपंथियों की धमकी

उल्फ़ा विद्रोही
Image caption उल्फ़ा का कट्टरपंथी धड़ा असम की स्वतंत्रता को केंद्र सरकार के साथ वार्ता का हिस्सा बनाना चाहता है.

असम के अलगाववादी संगठन उल्फ़ा के कट्टरपंथियों ने अपने ही संगठन के नरमपंथी सहयोगियों और केंद्र सरकार के बीच वार्ता को भंग करने की धमकी दी है.

उल्फ़ा के कट्टरपंथी धड़े की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि वे अपनी लड़ाई जारी रखने के प्रति दृढं संकल्प हैं.

उल्फ़ा के मुख्य कमांडर परेश बरुआ की अगुवाई वाले कट्टरपंथी धड़े के प्रसार सचिव अनिरुद्ध दुहोतिया ने बयान जारी कर कहा है, "असम की स्वतंत्रता की लड़ाई जारी रखने के लिए हमारे पास पर्याप्त संख्या है."

वार्तालाप

अनिरुद्ध दुहोतिया ने 'नए प्रशिक्षित लड़ाकों' की तस्वीरें भी जारी की हैं जो उनके अनुसार 'आज़ादी की लड़ाई को तेज़ करने के लिए तैयार हैं.'

ख़ुफ़िया सूत्रों का कहना है कि उन्होंने इस हफ़्ते वायरलैस पर कट्टरपंथी कमांडरों की बातचीत सुनी है जिससे संकेत मिलते हैं कि कट्टरपंथी सरकार से बातचीत की पेशकश करने वाले कुछ नरमपंथी नेताओं को मारने की तैयारी कर रहे हैं.

अपना नाम ना बताने की शर्त पर असम पुलिस की विशेष शाखा के एक अधिकारी ने कहा, "उल्फ़ा का कट्टरपंथी गुट अफ़रा-तफ़री फैलाने के लिए तेल रिफ़ाइनरियों और पाइपलाइनों जैसी जगहों पर धमाके भी कर सकते हैं."

उल्फ़ा के चेयरमैन अरबिंदा राजखोवा ने पिछले हफ़्ते असम के मुख्यमंत्री तरुण गगोई को ख़त लिख कर भारत सरकार के साथ वार्ता शुरू करने की पेशकश की थी.

राजखोवा की इस पेशकश का ज़मानत पर रिहा अधिकतर उल्फ़ा नेताओं ने अनुमोदन किया है लेकिन परेश बरुआ ने इसका विरोध किया है.

परेश बरुआ चाहते हैं कि असम की स्वतंत्रता प्रस्तावित वार्ता के एजेंडे शामिल हो.

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