गुजरात में कांगो वायरस ने ली तीन की जान

फ़ाइल फ़ोटो

गुजरात में एक ख़तरनाक वायरस ने तीन लोगों की जान ले ली है. दो लोगों को बीमारी के लक्षण नज़र आने पर अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.

पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वाइरोलॉजी (एनआईवी) की जाँच से पता चला कि ये क्रिमीयन कॉगो हैमरेजिक फ़ीवर वायरस है.

अहमदाबाद के पास सानंद तालुका में इस बीमारी के पहले मरीज़ सामने आए हैं.

सबसे पहले कोलाट गाँव की एक महिला अमीना मोमिन को इस बीमारी से मौत हुई. उनकी मौत के 10 दिन बाद उनके डॉक्टर और फिर उनकी तीमारदारी कर रही नर्स की भी मौत हो गई.

अब अमीना के पति और छोटे भाई को इस बीमारी के लक्षण पाए जाने पर अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.

गुजरात सरकार के स्वास्थ्य मंत्री जयनारायण व्यास का कहना है, “सानंद के आसपास के पाँच किलोमीटर के दायरे में 20 स्वास्थ्य टीमों को भेजा गया है. पर अभी तक इस रोग के लक्षण किसी अन्य व्यक्ति में नहीं देखे गए हैं.’’

एनआईसीडी ने कहा है कि उसने गुजरात प्रशासन को आगाह कर दिया है कि ये वायरस बहुत संक्रामक है और जल्द से जल्द इसकी रोकथाम के लिए क़दम उठाए जाने चाहिए.

टास्क फोर्स

सरकार ने बीमारी से निपटने के लिए एक टास्क फोर्स गठित की है. टास्क फोर्स का नेतृत्व डॉ कमलेश उपाध्याय कर रहे है.

गुजरात में ये टीम बीमारी की रोकथाम और इसके इलाज का काम करेगी.

जयनारायण व्यास का कहना है कि क्योंकि ये वायरस घातक है इसलिए इसके इलाज में देर नहीं की जा सकती.

उनका कहना था कि साथ ही स्वास्थ्य कर्मचारियों और डॉक्टरों से कहा गया है कि वे पूरी सावधानी बरतें. मरीज़ों का इलाज करते समय शरीर के बचाव का पूरा इंतज़ाम करें.

साथ ही दिल्ली के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ कम्युनिकेबल डिज़ीज़ (एनआईसीडी) की एक टीम गुजरात जा रही है.

बीमारी के लक्षण

इस बीमारी के लक्षण डेंगू जैसे होते है. ये आम तौर पर मवेशी, भेड़ों और बकरियों में पाए जाते हैं.

इस वायरस शरीर के विभिन्न अंगों पर प्रभाव डालता है जिसका असर दिमाग़ पर पड़ता है.

इससे मिर्गी जैसे दौरे पड़ते है और मौत हो जाती है. बीमारी घातक होती है बहुत जल्दी रोगी की जान ले लेती है इसलिए इसे ज़्यादा ख़तरनाक माना जाता है.

अफ्रीका के कुछ देशों, यूरोप और एशिया में इस वायरस के समाचार आए हैं पर भारत में अब तक इस बीमारी का कोई मामला सामने नहीं आया था.

कैसे फैलती है बीमारी

ये वायरस पिस्सू या टिक्स के ज़रिए आम तौर पर जानवरों में फैलता है.

मानव में ये वायरस या तो जानवरों के खून से संपर्क में आने या जानवरों के संक्रमित ऊतक के संपर्क में आने से फैलती है.

मानव से मानव में ये मल मूत्र, संक्रमित खून और लार के ज़रिए फैलती है.

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