'एमएसएफ़-रेडक्रॉस कर रहे हैं माओवादियों का इलाज'

नक्सली
Image caption नक्सल प्रभावित इलाक़ों में ये दोनों संस्थाएँ आम लोगों के इलाज का काम करती हैं

छत्तीसगढ़ पुलिस ने आरोप लगाया है कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता संगठन मेडसाँ सां फ़्रंटिए (एमएसएफ़) और इंटरनेशनल कमिटी ऑफ़ द रेड क्रॉस (आईसीआरसी) माओवादियों का इलाज कर रहे हैं.

बस्तर के दंतेवाड़ा ज़िले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसआरपी कल्लूरी ने बीबीसी संवाददाता सुवोजीत बागची से हुई बातचीत में कहा है कि गिरफ़्तार किए गए माओवादियों से पूछताछ से पता चला है कि एमएसएफ़ और रेडक्रॉस के डॉक्टर माओवादियों का इलाज कर रहे हैं.

उनका कहना है कि पुलिस इस मामले की आगे जाँच कर रही है.

लेकिन बीबीसी के छत्तीसगढ़ संवाददाता सलमान रावी के अनुसार पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन ने अपने एक वरिष्ठ अधिकारी कल्लूरी के बयान का खंडन करते हुए कहा है कि उनके बयान से कुछ ग़लतफ़हमी हुई है और राज्य सरकार तो अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस से एक समझौता भी करने वाली है.

एमएसएफ़ और रेडक्रॉस दोनों ने ही एसपीएस कल्लूरी के आरोपों पर आश्चर्य जताया है और इसका खंडन किया है.

एमएसएफ़ को डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर भी कहा जाता है और मानवीय सेवाओं के लिए इस संस्था को नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है जबकि रेड क्रॉस को भी दुनिया भर में उसकी सेवाओं के लिए जाना जाता है.

आरोप

एसआरपी कल्लूरी ने बीबीसी को बताया कि बुधवार को पुलिस ने दो माओवादियों को बस्तर के ही किरंदुल से गिरफ़्तार किया था.

उनका कहना है कि इन माओवादियों के पास से 30 हज़ार रुपए क़ीमत की दवाएँ मिली थीं जिसे वे वे अपने हथियार बंद कंपनी के पास लेकर जा रहे थे.

कल्लूरी के अनुसार इन माओवादियों से पूछताछ करने पर उस दवा दुकान का पता मिला जहाँ से ये दवाइयाँ ख़रीदी गई थीं. इसके बाद उस दुकानदार को भी गिरफ़्तार कर लिया गया.

दंतेवाड़ा के एसएसपी का कहना है, "इन लोगों ने पूछताछ में कहा कि उनका इलाज विदेशी डॉक्टर करते हैं जो एमएसएफ़ और रेडक्रॉस से जुड़े हुए हैं, जो इस इलाक़े में काम करते हैं."

छत्तीसगढ़ के स्थानीय मीडिया ने कल्लूरी के हवाले से कहा है कि उन्होंने इन दोनों संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है लेकिन बीबीसी से हुई बातचीत में उन्होंने इससे इनकार करते हुए कहा, "हम उन पर प्रतिबंध कैसे लगा सकते हैं."

स्थानीय मीडिया ने कल्लूरी के हवाले से कहा है, "वे ग़रीबों की सेवा के नाम पर यहाँ आते हैं और नक्सलियों की सहायता करते हैं."

उन्होंने कहा है कि एमएसएफ़ और रेडक्रॉस दोनों संस्थाओं के डॉक्टर नक्सलियों को दवा की पर्ची लिख रहे हैं और उनका इलाज कर रहे हैं.

आरोपों का खंडन

एमएसएफ़ और रेडक्रॉस दोनों ही संस्थाओं ने एसएसपी कल्लूरी के आरोप पर आश्चर्य जताया है और इसका खंडन किया है.

एमएसएफ़ के भारत के प्रमुख मार्टिन स्लूत ने बीबीसी से हुई बातचीत में इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा, "हम उन लोगों को चिकित्सा उपलब्ध करवाते हैं जिन्हें इसकी ज़रुरत है, ख़ासकर उन्हें जिनके पास चिकित्सा की सुविधा न्यूनतम है या फिर नहीं है. हम आम नागरिकों का इलाज करते हैं."

उनका कहना था कि हम बीजापुर और दंतेवाड़ा ज़िले में ग़रीब और ज़रुरतमंद लोगों का इलाज करते हैं और इसमें स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलता है.

एमएसएफ़ प्रमुख ने इस बात का खंडन किया कि वे माओवादियों या नक्सलियों का इलाज करते हैं और कहा "हम जिन लोगों का इलाज करते हैं उनमें ज़्यादातर महिलाएँ और बच्चे हैं."

लेकिन उन्होंने स्वीकार किया, "हम उन सभी लोगों का इलाज करते हैं जो किसी तरह की वर्दी में नहीं होते और हथियारबंद नहीं होते. लेकिन हम किसी को देखकर नहीं पहचान सकते कि वह माओवादी है या नहीं. हम तो बिना किसी भेदभाव के हर किसी का इलाज करते हैं."

मार्टिन स्लूत ने बीबीसी को बताया कि इस बयान के बाद एसएसपी कल्लूरी से उनकी मुलाक़ात हुई है. उनका कहना है कि कोई ग़लतफ़हमी थी जो अब दूर कर ली गई है.

उन्होंने बताया कि एसएसपी ने उन्हें आगाह किया है कि राज्य के क़ानून के अनुसार माओवादियों की सहायता करना अपराध है और जवाब में उन्होंने (मार्टिन ने) कहा है, "एमएसएफ़ एक चिकित्सा संस्थान है और वह कोई राजनीतिक संस्थान नहीं है. हम राज्य और माओवादियों के संघर्ष के बीच नहीं आना चाहते."

इसी तरह रेडक्रॉस के प्रवक्ता सुरेंद्र ओबरॉय ने छत्तीसगढ़ पुलिस के बयान पर आश्चर्च प्रकट करते हुए कहा है कि जिस इलाक़े की बात की जा रही है वहाँ तो रेडक्रॉस काम ही नहीं कर रहा है.

उनका कहना है कि ये बात दंतेवाड़ा की की जा रही है लेकिन रेडक्रॉस तो बीजापुर में काम करता है और वह भी बहुत छोटा सा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित करने का है.

उन्होंने कहा, "हम उसकी मदद करते हैं जिसको इसकी ज़रुरत है और हम सारी दुनिया में एक सिद्धांत के साथ काम करते हैं, ये सबको पता है."

रेडक्रॉस के प्रवक्ता का कहना है कि संस्था प्रशासन के साथ चर्चा के बाद ही काम करती है और इस समय भी प्रशासन से संस्था की बात चल रही है और हो सकता है कि आने वाले समय में रेडक्रॉस का काम वहाँ बढ़े.

सेवा और शक

फिलहाल एमएसएफ़ बीजापुर जिले में एक अस्पताल और चिकित्सा केंद्र संचालित करती है इसके अलावा वह दंतेवाड़ा में मोबाइल स्वास्थ्य केंद्र भी चलाती है. उसी तरह रेड क्रॉस बीजापुर के कुटरू इलाक़े में एक स्वास्थ केंद्र का संचालन करती है और वह भी स्थानीय प्रशासन के सहयोग से.

इन दोनों संस्थाओं के अलावा रामकृष्ण मिशन भी बस्तर के आदिवासियों, ख़ासतौर पर अबूझमाड़ के आदिवासियों के बीच शिक्षा और चिकित्सा के काम में लगा हुआ है.

हाल ही में पुलिस ने रामकृष्ण मिशन आश्रम पर आरोप लगाया था कि वह माओवादियों को चावल और दवाइयाँ पहुंचाते हैं

इसके फलस्वरूप रामकृष्ण मिशन को अबूझमाड़ के अंदर ले जाए जाने वाली हर सामग्री का ब्यौरा पुलिस को देना पड़ता है.

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