भगदड़ पर एक दूसरे पर दोषारोपण

  • 20 जनवरी 2011
सबरीमाला भगदड़
Image caption भगदड़ के बाद आरोप लगाया गया था कि वहाँ व्यवस्था ठीक नहीं थी

पुल्लुमेडू भगदड़ हादसे पर त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड और केरल पुलिस ने अपनी रिपोर्ट केरल हाई कोर्ट में दाख़िल कर दी है.

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में मकरज्योति का दर्शन करके लौट रहे 102 श्रद्धालु 14 जनवरी को पुल्लुमेड में हुई एक भगदड़ में मारे गए थे.

भारतीय टीवी चैनल सीएनएन-आईबीएन के अनुसार पुलिस ने हाई कोर्ट में पेश की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पुलिस ने तमाम बाधाओं के बावजूद अच्छे इंतज़ाम किए थे.

पुलिस ने कहा है कि जहां भगदड़ हुई वो क्षेत्र एक टाइगर रिज़र्व है और वहां इससे अच्छी व्यवस्था करने के लिए उनके अनुमति नहीं थी.

हालांकि पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि क्षेत्र भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त पुलिस बल नहीं था. पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार पुल्लुमेडू क्षेत्र में दुर्घटना वाले दिन 279 पुलिसकर्मी तैनात थे.

उधर सबरीमाला मंदिर को चलाने वाली संस्था त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड ने भी होई कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की है. बोर्ड की रिपोर्ट में पुलिस और वन विभाग को भगदड़ के लिए दोषी बताया है.

वन विभाग ने अदालत को बताया है कि क्षेत्र में सिर्फ़ 50 पुलिसकर्मी मौजूद थे.

कुल मिलाकर कोई पक्ष घटना की सीधी ज़िम्मेदारी लेने से बच रहा है.

छह-छह लाख मुआवज़ा

सबरीमाला मंदिर में मकरज्योति के दर्शन करने बाद लौट रहे 102 श्रद्धालु पुल्लुमेडू में हुई एक भगदड़ में मारे गए थे.

Image caption भगदड़ में मारे गए लोगों के निकटतम संबंधी को पांच लाख रुपए दिए जाएंगे.

इसीबीच केरल के मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन ने कहा है कि भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवज़ा बांटने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा.

राज्य सरकार और त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड भगदड़ में मारे गए हर व्यक्ति के निकटतम संबंधी को पांच लाख रुपए देंगे.

इसके अलावा प्रधानमंत्री ने भी मरने वाले लोगों के परिवार के लिए एक-एक लाख रुपए की राशि देने की घोषणा की है.

भगदड़ में घायल लोगों को चोट की गंभीरता को देखते 25 से 50 हज़ार रुपए दिए जाएंगे.

एक सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सबरीमाला में दिखने वाली 'मकरज्योति' के बारे में कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं करवाना चाहती.

अच्युतानंदन ने कहा कि वो इस बात की जांच करेंगें कि 1999 में सबरीमाला में हुई भगदड़ पर जस्टिस चंद्रशेखर कि रिपोर्ट को विधानसभा में क्यों पेश नहीं किया गया था.

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