दारा सिंह को उम्र क़ैद, 11 बरी

भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटों की हत्या के मामले में दारा सिंह की उम्र क़ैद की सज़ा को बरकरार रखा है.

दारा सिंह के सहयोगी महेंद्र हेंब्रम को भी उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई है. अन्य 11 अभियुक्तों को अदालत ने बरी कर दिया है.

केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई ने इस मामले में मौत की सज़ा की मांग की थी.

उड़ीसा हाई कोर्ट ने दारा सिंह को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.

स्टेंस और उनके बेटों को 1999 में उड़ीसा के क्योंझर ज़िले में ज़िंदा जला दिया गया था.

दिसंबर की ठंडी रात में स्टेंस अपने घर के रास्ते में एक कार के अंदर अपने बेटों के साथ सो रहे थे.

मनोहरपुर गांव में एक भीड़ ने उनकी गाड़ी पर पेट्रोल छिड़ककर उसमें आग लगा दी.

स्टेंस ने कार से निकलकर भागने की भी कोशिश की लेकिन भीड़ ने कथित रूप से उन्हें निकलने नहीं दिया.

स्टेंस वहां 30 सालों से कुष्ठ रोगियों के साथ काम कर रहे थे लेकिन उनपर वहां धर्मांतरण करवाने का भी आरोप लगा था.

दारा सिंह के संबंध दक्षिणपंथी बजरंग दल से भी बताए जाते हैं.

धर्म परिवर्तन

दारा सिंह के वकील शिवशंकर मिश्रा ने फ़ैसले के बाद पत्रकारों को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस बात के पक्के सबूत मिले हैं कि स्टेंस जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े हुए थे.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने सुप्रीम कोर्ट के हवाले से कहा है: “हम उम्मीद करते हैं कि महात्मा गांधी का जो स्वप्न था कि धर्म राष्ट्र के विकास में एक सकारात्मक भूमिका निभाएगा वो पूरा होगा. किसी की आस्था को ज़बरदस्ती बदलना या फिर ये दलील देना कि एक धर्म दूसरे से बेहतर है उचित नहीं है.”

शिवशंकर मिश्रा का कहना था कि अदालत ने कहा कि जबरन धर्म परिवर्तन समाज के लिए अच्छा नहीं है.

दिल्ली कैथोलिक चर्च के प्रवक्ता डॉमिनिक इमैनुएल ने अदालत के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वो ख़ुद भी फांसी की सज़ा के हक़ में नहीं थे.

उनका कहना था: “हमारा धर्म माफ़ी में विश्वास रखता है. उम्र क़ैद इन लोगों को सुधरने का भी मौका देता है. मुझे खुशी है कि उन्हें उम्र क़ैद मिली है क्योंकि उन्हें अपने कर्मों पर सोचने का भी मौका मिलेगा और शायद कुछ अच्छी नसीहत भी मिलेगी.”

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