महंगाई पर विपक्ष करेगा विरोध प्रदर्शन

फल विक्रेता
Image caption बढ़ती महंगाई पर विपक्ष का विरोध

देश के नौ राजनीतिक दलों ने महंगाई के ख़िलाफ़ एक हफ़्तें के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की घोषणा की है.

इनमें चार वामपंथी दलों के अलावा तेलुगु देशम, राष्ट्रीय लोक दल, अन्नाद्रमुक, बीजू जनता दल और जनता दल सेक्युलर शामिल होंगे.

ग़ैर बीजेपी विपक्ष का ये धरना प्रदर्शन कार्यक्रम केंद्र की यूपीए सरकार के महंगाई पर बेपरवाह रवैये के ख़िलाफ़ तीन से नौ फरवरी के बीच होगा.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता प्रकाश करात ने कहा, “सरकार की नीतियां ही मुद्रास्फीति के लिए ज़िम्मेदार है. जून से अब तक सात बार तेल की कीमतें बढ़ाई गई है,जिससे क़ीमतें 20 प्रतिशत बढ़ गई और पिछले चार हफ्तों में दो बार इसमें बढ़ोतरी की गई.”

विपक्ष की मांग

ये पार्टियां न केवल सरकार से क़ीमतों पर अंकुश लगाने के लिए क़दम उठाने की मांग करेंगी बल्कि ये भी मांग करेंगी कि खाद्यान्न और ज़रुरी सामान में वायदा क़ारोबार पर रोक लगाई जाए.

सार्वजनिक वितरण व्यवस्था सभी के लिए उपलब्ध करवाई जाए, जमाख़ोरों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए, किसानों को अपनी उपज का वाजिब दाम मिलें, उन्हें खाद आदि सही दामों पर मिले, पेट्रोल की क़ीमतों पर सरकारी नियंत्रण फिर से लागू किया जाए और खुदरा व्यापार में विदेशी कंपनियों के आने पर रोक लगाई जाए.

इन पार्टियों का कहना है कि जहाँ एक ओर आम आदमी महंगाई की मार झेल रहा है वहीं देश मे चारों तरफ फैले भ्रष्टाचार और देश की संपदा के दोहन की चर्चा है.

सरकार बेपरवाह

इन पार्टियों ने जो प्रेस विज्ञप्ति जारी की है उसमें कहा है, “फ़िर भी यूपीए सरकार लोगों की तक़लीफ़ों से बेपरवाह है. झूठी तसल्ली दी जा रही है कि कुछ ही समय में क़ीमतें कम होने लगेगी. क़ीमतें कैसे और कब कम होगी इस पर मंत्री अलग अलग और विरोधाभासी बयान दे रहे हैं.”

इन पार्टियों का कहना था कि किसान आत्महत्या कर रहे हैं वहीं खुदरा बाज़ार में 51 प्रतिशत विदेशी निवेश लाने का मन बनाने वाली सरकार लाखों दुकानदारों और व्यापारियों की जीविका ख़तरें में डालने का मन बना रही है.

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