कर्नाटक को लेकर राजनीति गरमाई

बीएस येदुरप्पा
Image caption कर्नाटक के भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच लोकायुक्त और एक न्यायिक समिति कर रही है

कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा और उनके एक मंत्री के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी दे दी है.

इसके बाद उन्होंने राज्य के मंत्रिमंडल की उस प्रस्ताव को भी ख़ारिज कर दिया है जिसमें इस अनुमति को वापस लेने की बात कही गई थी.

इसके बाद कर्नाटक में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं और मुख्यमंत्री येदुरप्पा ने कहा है कि भाजपा नेताओं का एक प्रतिनिधि मंडल राष्ट्रपति से मिलकर राज्यपाल को वापस बुलाने के लिए गुहार लगाएगा.

रा्ज्यपाल का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामले में मुख्यमंत्री येदुरप्पा के ख़िलाफ़ मामला चलाने के लिए पर्याप्त वजहें हैं और उनके पास मुक़दमा चलाने की अनुमति देने के अधिकार हैं.

वापस बुलाने की मांग

मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा ने कहा है कि राज्यपाल को 'बिना शर्त' माफ़ी माँगना चाहिए.

उन्होंने कहा है कि 24 जनवरी को भाजपा के नेता और सांसद राष्ट्रपति से मिलेंगे और उनसे मांग करेंगे कि कर्नाटक के राज्यपाल को वापस को बुला लिया जाए.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने अपने ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाए जाने की अनुमति देने को 'उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे' का मामला बताते हुए कहा है कि राज्यपाल ने जो कुछ किया है वह राज्य की जनता का अपमान है.

इस बीच राज्य की भाजपा इकाई ने राज्य के हर ज़िले में राज्यपाल को वापस बुलाने की माँग करते हुए प्रदर्शन करने की घोषणा की है.

पार्टी ने कहा है कि राज्य के भाजपा विधायक और मंत्री 25 जनवरी को 'राजभवन चलो' के नाम से एक रैली निकालेंगे और 'राजभवन खाली करने' की मांग करेंगे.

लेकिन राज्यपाल ने एक बयान जारी कर अपने फ़ैसले को सही ठहराते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ जो आरोप लगाए गए हैं वो उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं.

उन्होंने कहा, "सितंबर 2010 के बाद से मीडिया में ज़मीन घोटालों, भ्रष्टाचार और सार्वजनिक भूमि के अधिग्रहण के लिए नियमों में तोड़मरोड़ की जो ख़बरें आई हैं उसे सब जानते हैं."

राजनीति से प्रेरित

इस बीच दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने कहा है कि राज्यपाल ने मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की जो अनुमति दी है वह राजनीति द्वेष से प्रेरित क़दम है.

उन्होंने कहा, "राज्यपाल के पास के केस से संबंधित सारे काग़ज़ात भी नहीं है. उनके पास सिर्फ़ कुछ ही काग़ज़ पहुंचे. राज्यपाल इतनी जल्दी में हैं कि बिना सारे काग़ज़ात मिले ही जांच की अनुमति दे रहे हैं."

उनका कहना है कि जिन मामलों का हवाला दिया गया है कि उसकी जाँच लोकायुक्त पहले से ही कर रहे हैं और सरकार से एक सेवानिवृत्त जज को अलग से इसकी जाँच करने को कहा है लेकिन राज्यपाल ने इन जाँचों से पहले अपनी जाँच कर ली और मुक़दमा चलाने की अनुमति दे दी.

अरुण जेटली ने हंसराज भारद्वाज पर 'राजनीतिक राज्यपाल' होने का आरोप लगाया.

वे इस सवाल को टाल गए कि ऐसी सूरत में जब मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति दी जा चुकी है, क्या वे अपने पद पर बने रहेंगे और कहा कि भाजपा के नेता इस मामले में एक बैठक करेंगे और फ़ैसला करेंगे कि इसके बाद क्या क़दम उठाने चाहिए.

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