भ्रष्टाचार: रथ की वरिष्ठता में कटौती

  • 22 जनवरी 2011
सैन्य अधिकारी
Image caption लेफ़्टिनेंट जनरल रथ को मामला सामने आने के बाद ही उप प्रमुख के पद से हटा दिया गया था

पश्चिम बंगाल के सुकना भूमि घोटाले के मामले में भारतीय सेना के लेफ़्टिनेंट जनरल पीके रथ को एक सैन्य अदालत ने सज़ा सुना दी है.

उन्हें कड़ी फटकार लगाने के अलावा उनकी वरिष्ठता में दो साल की कटौती कर दी गई है और पेंशन के मामले में उनकी वरिष्ठता में 15 बरसों की कटौती कर दी गई है.

सेना के इतिहास में भ्रष्टाचार के मामले में सज़ा पाने वाले वे सबसे बड़े अधिकारी हैं.

कोर्ट मार्शल ने शुक्रवार को तैंतीसवे कोर के कमांडर रहे लेफ़्टिनेंट जनरल रथ को ज़मीन के लिए 'नो ऑबजेक्शन सर्टिफ़िकेट' जारी करने, बिल्डर के साथ सहमति-पत्र पर हस्ताक्षर करने और इस विषय की जानकारी कमांड मुख्यालय को ना देने का दोषी ठहराया था.

पश्चिम बंगाल में सुकना सैन्य ठिकाने के बगल की 70 एकड़ की यह ज़मीन एक निजी बिल्डर को शैक्षणिक संस्थान के निर्माण के लिए दी गई थी.

उनके परिजनों ने कहा है कि वे इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे.

सज़ा का मतलब

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार कोर्ट मार्शल का नेतृत्व कर रहे लेफ्टिनेंट जनरल आईजे सिंह ने अपने फ़ैसले में कड़ी फटकार लगाने के अलावा उनकी वरिष्ठता में दो वर्ष की कटौती और पेंशन के रुप में मिलने वाले उनके लाभ में 15 वर्षों की उनकी वरिष्ठता कम करने के आदेश दिए हैं.

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि सेना की दृष्टि से इतने बड़े अधिकारी को कोर्ट मार्शल की ओर से कड़ी फटकार भी गंभीर माना जा सकता है.

उनका कहना है कि वरिष्ठता में दो साल की सज़ा कम करने का अर्थ यह है कि अगर इस सज़ा के बाद भी वे सेना में बने रहने का फ़ैसला करते हैं तो उन्हें अब कोई पदोन्नति नहीं मिल सकेगी.

वैसे लेफ़्टिनेंट जनरल रथ वरिष्ठता के क्रम में काफ़ी ऊपर गिने जाते रहे हैं और उन्हें वर्ष 2008 में यह मामला आने से पहले सेना उप प्रमुख के पद के लिए नामित किया गया था.

लेकिन इस मामले के सामने आने के बाद उनको इस संभावित पदस्थापना से हटा लिया गया था.

विशेषज्ञों का कहना है कि दो वर्ष की वरिष्ठता खोने के बाद संभव है कि वे सेवानिवृत्ति तक सिर्फ़ लेफ़्टिनेंट जनरल ही बने रह जाएँ. सेना में उनका कार्यकाल वर्ष 2012 तक है.

तीसरी सज़ा यानी सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन के लिए उनकी वरिष्ठता में 15 वर्षों की कटौती के फ़ैसले का मतलब यह है कि उन्हें वह पेंशन नहीं मिल सकेगी जो सेना में इतनी लंबी सेवा और इतनी वरिष्ठता के बाद मिलनी चाहिए थी.

विशेषज्ञों का कहना है कि अब उन्हें सेना के हिसाब से न्यूनतम जैसी ही राशि पेंशन के रुप में मिलेगी.

और भी अधिकारी

लेफ़्टिनेंट जनरल रथ के वकील मेजर एसएस पांडे ने शुक्रवार को बताया था कि उन पर सात आरोप थे जिनमें ठगी का मामला भी था लेकिन उन्हें चार आरोपों से बरी कर दिया गया.

सैन्य अदालत की एक जाँच में लेफ़्टिनेंट जनरल रथ के साथ लेफ़्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश और लेफ़्टिनेंट जनरल रमेश हालगुली और मेजर जनरल पीके सेन को भी दोषी पाया गया था.

लेफ़्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश तत्कालीन सेना प्रमुख दीपक कपूर के सैन्य सचिव थे और लेफ़्टिनेंट जनरल रमेश हालगुली सेना के ग्यारवें कोर के कमांडर थे.

जाँच के बाद लेफ़्टिनेंट जनरल रथ और लेफ़्टिनेंट जनरल प्रकाश के ख़िलाफ़ तो कोर्ट मार्शल के आदेश दिए गए थे लेकिन बाक़ी दोनों अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए थे.

लेफ़्टिनेंट जनरल प्रकाश इन चारों अधिकारियों में सबसे वरिष्ठ हैं और अभी उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है और उनके मामले की सुनवाई कोलकाता में पूरी हो चुकी है.

लेफ़्टिनेंट जनरल हालगुली इस समय दिल्ली के सैन्य मुख्यालय में सैन्य प्रशिक्षण के महानिदेशक की तरह काम कर रहे हैं.

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