सेन के समर्थन में यूरोपीय पर्यवेक्षक दल

  • 23 जनवरी 2011
बिनायक सेन

यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों के एक दल ने 24 जनवरी को बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय में मानवाधिकार कार्यकर्ता बिनायक सेन की ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई के दौरान मौजूद रहने की इच्छा ज़ाहिर की है.

इस संबंध में यूरोपीय संघ ने भारत के विदेश मंत्रालय से अनुमति भी मांगी है.

लेकिन यूरोपीय संघ की इस पहल की छत्तीसगढ़ में आलोचना हो रही है.

यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि मंडल का कहना है कि वह बिनायक सेन की सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद रहना चाहता है.

इस प्रतिनिधि मंडल में आठ सदस्य हैं जिसमे बेल्जियम, जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस, हंगरी और ब्रिटेन के प्रतिनिधि शामिल हैं.

इस प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व डेनियल स्माज्डा कर रहे हैं.

ख़बरें मिल रहीं हैं कि यूरोपीय संघ के प्रतिवेदन को विदेश मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ सरकार को भेजा है.

अधिवक्ताओं में मतभेद

राज्य सरकार फ़िलहाल इस पर कुछ भी कहने से कतरा रही है मगर इस मामले को लेकर राज्य के अधिवक्ता बंटे नज़र आ रहे हैं.

बार काउन्सिल के सदस्य फैसल रिज़वी ने यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि इस तरह का क़दम भारतीय न्याय प्रणाली पर संदेह जताने के बराबर है.

उनका कहना है कि पर्यवेक्षकों का विरोध होना चाहिए.

भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने ने पर्यवेक्षकों के विरोध की घोषणा की है.

वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता और भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद राम जेठमलानी 24 जनवरी को उच्च न्यायलय में बिनायक सेन की तरफ़ से पैरवी करेंगे.

ख़ुद राम जेठमलानी मानते हैं कि अदालत में कोई भी उपस्थित रह सकता है. वकीलों में भी एक बड़ा तबक़ा है जो मानता है कि यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि मंडल की मौजूदगी का विरोध नहीं होना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि बिनायक सेन और दो अन्य लोगों को रायपुर की एक निचली अदालत ने 24 दिसंबर को राजद्रोह का दोषी पाते हुए उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.

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