बिनायक सेन की ज़मानत पर सुनवाई

  • 24 जनवरी 2011
यूरोपीय यूनियन के प्रतिनिधिमंडल के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

बिनायक सेन की ज़मानत अर्ज़ी पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय में सुनवाई सोमवार को पूरी नहीं हो पाई और ये मंगलवार को भी जारी रहेगी.

सुनवाई के दौरान यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल को मौजूद रहने की अनुमति दे दी गई.

बिनायक सेन की ओर से राम जेठमलानी ने बहस की जबकि सरकार का पक्ष अतिरिक्त महाधिवक्ता किशोर भादुड़ी ने रखा.

इसके पहले रविवार रात जब बेल्जियम, जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस, हंगरी और ब्रिटेन के प्रतिनिधियों समेत कुल आठ लोग रायपुर पहुँचे तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने हवाई अड्डे के बाहर नारेबाज़ी की और काले झंडे दिखाकर अपना विरोध जताया.

प्रदर्शनकारी 'ईयू प्रतिनिधिमंडल वापस जाओ, वापस जाओ' के नारे लगा रहे थे.

कौन हैं बिनायक सेन?

इस प्रतिनिधिमंडल में हंगरी के पीटर किम्पियन, फ्रांस के राफ़ेल मार्टिन, स्वीडेन की एलेग्ज़ांद्रा बर्ग, जर्मनी के फ़्लोरियन बुकहार्ट, बेल्जियम के जोकहेन और ब्रिटेन के लेन ट्विग्ग शामिल हैं.

ग़ौरतलब है कि बिनायक सेन और दो अन्य को रायपुर की एक निचली अदालत ने 24 दिसंबर को राजद्रोह का दोषी पाया था और उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.

छत्तीसगढ़ की सरकार ने यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के लिए विशेष सुरक्षा का इंतज़ाम किए गए हैं. विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए बिलासपुर में उच्च न्यायलय में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी.

इस प्रतिनिधिमंडल के हवाई अड्डे पर ही रुकने की व्यवस्था की गई थी और सोमवार सुबह इन्हें बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय लाया गया.

आलोचना

बिनायक सेन पेशे से डॉक्टर हैं और लगभग तीन दशक से छत्तीसगढ़ में काम कर रहे हैं.

Image caption यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल अदालत की कार्यवाही देखने पहुँचा है

राज्य सरकार और पुलिस का कहना है कि उन्हें कुछ माओवादियों के साथ सांठगांठ करते पाया गया था.

इस फ़ैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भारत के भीतर भी ख़ासी आलोचना हुई है और अनेक लेखकों और बुद्धिजीवियों ने इस बारे में अपना विरोध जताया था.

जानकारों का मानना है कि ऐसा शायद पहले नहीं हुआ है कि विदेशी पर्यवेक्षकों ने भारत में किसी अदालती कार्यवाही के दौरान अदालत में मौजूद रहने में इच्छा दिखाई है.

मैं अपने देश में सुरक्षित नहीं: एलीना सेन

इससे पहले इस संबंध में यूरोपीय संघ ने भारत के विदेश मंत्रालय से अदालत की कार्यवाही देखने की अनुमति मांगी थी.

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की बार काउंसिल के सदस्य फ़ैसल रिज़वी ने यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि इस तरह का क़दम भारतीय न्याय प्रणाली पर संदेह जताने के बराबर है.

लेकिन वकीलों में एक बड़ा तबक़ा ऐसा है जो मानता है कि यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी का विरोध नहीं होना चाहिए. ख़ुद राम जेठमलानी मानते हैं कि अदालत में कोई भी मौजूद रह सकता है.

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