'सरकार कुछ भी छुपा नहीं रही है'

  • 25 जनवरी 2011
प्रणब मुखर्जी
Image caption प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार कुछ भी छुपाना नहीं चाहती है

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि सरकार काले धन के बारे में पूरी जानकारी जुटाने और उसे वापस देश लाने के लिए प्रतिबद्ध है.

वित्त मंत्री का कहना था कि सरकार ऐसे उपायों पर ज़ोर दे रही है जिससे लोग विदेशों में काला धन जमा ही न कर पाएं.

प्रणब मुखर्जी ने बताया कि अभी तक काले धन की मात्रा के बारे में कोई ठोस या पुख्ता आकड़े नहीं है लेकिन विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार भारत से 462 अरब डॉलर की राशि बाहर के देशों में जमा है.

सुप्रीम कोर्ट में काले धन से जुड़े मामले में सरकार ने कुछ लोगों के नाम गुप्त रुप से दिए हैं. इस बारे में पूछे गए सवाल पर वित्त मंत्री का कहना था, ‘‘ सरकार कुछ भी छुपा नहीं रही है. 18 मामलों में हमें एक देश से जानकारी मिली है. आयकर अधिकारियों ने सील लिफ़ाफ़े में वो नाम कोर्ट को दिए हैं. जब आयकर विभाग इन लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज करेगा तो नाम सामने आ जाएंगे.’’

काले धन के बारे में वित्त मंत्री का कहना था, ''सरकार को इस बात में रुचि है कि काले धन का विवरण सामने आए और उसे वापस लाया जाए. साथ ही उन ख़ामियों को दूर किया जाए जिससे काला धन बाहर जा रहा है.''

भाजपा ने की आलोचना

हालांकि मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सरकार की रणनीति की आलोचना की है और कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर ढुलमुल रवैया अपना रही है और नाम छुपा रही है.

भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद का कहना था, ''सरकार को नाम उजागर करना चाहिए क्योंकि इसमें हो सकता है बड़े लोगों के नाम हों.''

यह पूछे जाने पर कि सरकार ये नाम उजागर क्यों नहीं कर रही है तो उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के तहत सरकार वो नाम उजागर नहीं कर सकती है और ये काम कोर्ट का है.

उन्होंने यहां तक कहा कि वो निजी तौर पर भी इन लोगों के नाम नहीं जानते हैं और न ही ये नाम जानना उनके अधिकार क्षेत्र में आता है.

वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार पाँच सूत्री रणनीति पर कार्य कर रही है जिसके तहत काले धन को विदेशों में जाने से रोका जा सके और विभिन्न देशों से इस बारे में सूचनाओं का आदान प्रदान हो सके.

प्रणब मुखर्जी ने बताया कि 2009 में जी-20 देशों की बैठक के बाद काले धन को लेकर जानकारियों का आदान प्रदान बढ़ा है.

उनका कहना था, ‘‘2009 से पहले स्विस बैंक जानकारी ही नहीं देता था. अब हमने कई देशों के साथ दोहरा टैक्स बचाव संबंधी समझौते किए हैं. कई देशों से कर सूचना समझौते हो रहे हैं. कई देशों से बातचीत हो रही है.’’

सरकार का कहना था कि वो काले धन को लेकर गंभीर है और व्यापक स्तर पर उपाय कर रही है ताकि आने वाले दिनों में इस पूरी समस्या पर नियंत्रण किया जा सके.

समिति विचार करेगी

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार उन लोगों को माफ़ी देने पर विचार कर रही है जिनके पैसे विदेशों में जमा है और इस रास्ते पैसे वापस लाने की कोशिश कर रही है, उनका कहना था, ‘‘इस तरह के फ़ैसलों के लाभ और नुक़सान दोनों होते हैं. एक समिति है जो इस पर विचार कर रही है और सलाह देगी.’’

वित्त मंत्री ने बताया कि विभिन्न लोगों को मिलाकर एक विशेषज्ञ कमिटी बनी है जो इस बात का पता लगा रही है कि भारत से कितने लोगों ने विदेशों में किस मात्रा में और किस तरह धन जमा किया है.

वित्त मंत्री ने बताया कि देशों के साथ बिना किसी क़ानूनी समझौते के जानकारी लेना असंभव होता है और इसी कारण सरकार ने कई देशों के साथ इस संबंध में समझौते करने का रास्ता अपनाया है.

स्विस बैंक के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकार ने स्विस सरकार के साथ एक समझौता किया है जिसके आधार पर स्विस बैंकों में जमा पैसे के बारे में जानकारी मिल सकती है लेकिन ये जानकारी तभी मिल सकेगी जब स्विस सरकार अपनी संसद में समझौते को मंजूरी दे देगी.

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