मुसलमान ने बनवाया मंदिर

Image caption अश्क अली नथानी कहते हैं कि सभी धर्म एकता का संदेश देते है.

रंगबिरंगे राजस्थान में एक ऐसा मंदिर भी है जो है तो हिन्दुओं की श्रद्धा का प्रतीक मगर इसे बनवाया है एक मुसलमान ने.

राजस्थान में बाघों की पनाहगाह रणथंभौर के पास जब गणेश मंदिर के पट खुले तो ऐसा ध्वनित हुआ जैसे आरती और अज़ान मिलकर कह रहे हों, मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर करना.

कभी जीर्ण-शीर्ण रहे इस मंदिर को अपने प्रयासों से भव्यता का तानाबाना पहनाने वाले महाराष्ट्र के मुस्लिम उद्योगपति आशिक़ अली नथानी कहते हैं कि सभी धर्म एकता का संदेश देते हैं.

वो कहते हैं, ''कुछ समय पहले जब मुझे एक सहयोगी ने इस इलाके के एक मंदिर में चलने को कहा तो मैं इस मंदिर में आया और देख कर दुःख हुआ कि ये पूजा स्थल खराब हालत में था, तभी मैंने इसे नए तरीक़े से बनवाने का फैसला किया.

धर्म का मर्म

सवाई माधोपुर से कोई 13 किलोमीटर दूर इस मंदिर के निकट ही बाघों की शरण स्थली है. इसीलिए अक्सर यहाँ वनराज की दहाड़ सुनाई देती है.

मगर गुरुवार को मंदिर की घंटियों की गूंज के बीच जब आरती हुई तो गोया उसमे में सारे धर्म समाहित हो गए हो.

मंदिर के उम्रदराज़ पुजारी बाबा प्रभुदास कहने लगे सारे धर्मो का मर्म तो इंसानियत ही है.

यूँ तो इस्लाम में मूर्ति पूजा की मनाही है, मगर आशिक़ अली के ज़हन में तो भारत की धर्मनिरपेक्ष परंपराएं बसी हैं.

उन्होंने कहा, ''हमारी नज़र में मंदिर-मस्जिद में कोई फर्क नहीं है. सब उसका है, उसे आप अल्लाह कहें, भगवान कहें या जो भी कहें वो एक ही है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि आशिक़ अली ने इस मंदिर की मरम्मत पर लगभग दो करोड़ रूपये खर्च किए हैं.

आशिक़ अली कहते हैं कि वो इस इलाक़े में अब एक अस्पताल और शिक्षा केंद्र भी बनवाना चाहते हैं.

भारत में ही एक स्थान पर मंदिर हो या मस्जिद इस मुद्दे पर दो समुदाय पहले ज़मीन पर लड़े फिर सुप्रीम-कोर्ट तक गए पर ये नज़ीर इंसानी बस्ती से दूर बाघों की पनाहगाह के नज़दीक से आई है जहां खुदा के एक बंदे ने एक मंदिर तामीर कराया है.

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