नक्सलियों ने एसपीओ को रिहा किया

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption नक्सलियों ने एसपीओ श्रीकांत भोया को स्थानीय लोगों और पत्रकारों के सामने रिहा किया.

नारायणपुर ज़िले के गोंग्लाबज़र से अपहृत विशेष पुलिस अधिकारी यानी एसपीओ को सोमवार की देर शाम माओवादियों नें रिहा कर दिया है.

एसपीओ श्रीकांत भोया को माओवादियों ने अबूझ माड़ के जंगलों में एक अज्ञात स्थान पर उसके गाँव के लोगों और स्थानीय पत्रकारों के सामने आज़ाद कर दिया.

कहा जा रहा है कि बेलगाँव का रहने वाला भोया गोंगला के एक साप्ताहिक बाज़ार में गया हुआ था जब उसे माओवादियों नें अगवा कर लिया था.

विशेष पुलिस अधिकारियों को माओवादी अपना बड़ा दुश्मन मानते हैं. खास तौर पर सलवा जुडूम के बाद से उनमें और एसपीओ में 36 का आंकड़ा है.

भोया को छोड़े जाने पर पुलिस के अधिकारी भी आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं.

एक अज्ञात स्थान पर सूरज ढलने से पहले गांववाले और पत्रकार जमा थे. साथ ही भोया के परिवार के लोग भी.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption महिला नक्सल कमांडर चंद्रा

फिर पास की झाड़ियों में हलचल हुई और माओवादियों का एक हथियारबंद दस्ता प्रकट हुआ. सब के लिए आश्चर्य की बात यह थी कि इस दस्ते का नेतृत्व एक अधेड़ उम्र की महिला कमांडर चंद्रा रही थी.

इस महिला नें अपनी शिनाख्त एरिया कमांडर के रूप में कराई.

कुछ ही पलों में श्रीकांत भोया को युद्ध बंदी की तरह ग्रामीणों और पत्रकारों के सामने पेश किया गया. जब उसे लाया जा रहा था तो उसके हाथ बंधे हुए थे और हथियारबंद छापामार उसे घेरे हुए थे. बाद में उसे बंधन से मुक्त किया गया.

चंद्रा नें कहा कि श्रीकांत भोया को जनता की मांग की वजह से छोड़ा गया. "जनता के लिए हमने उसे छोड़ा. हलांकि वह हमारा दुश्मन है. हमने उससे पूछ ताछ की और 13 दिनों तक उसे अपने साथ रखा."

चंद्रा का कहना था कि निर्दोष ग्रामीणों को माओवादी कहकर जेल भेजा जा रहा है और उस पर फ़ौरन रोक लगनी चाहिए.

उनका कहना था, "हम एसपीओ से भी अपील करते हैं कि निर्दोष जनता पर अत्याचार ना करें. हम उनसे अपील करते हैं कि रोज़गार के लिए वह कोई दूसरी नौकरी करें और अपने इस पद को त्याग दें."

हालाकि महिला कमांडर का दावा है कि श्रीकांत के बदले पुलिस नें कुछ निर्दोष ग्रामीणों को अपनी हिरासत से छोड़ा है. मगर पुलिस इस मामले से अनभिज्ञता ज़ाहिर कर रही है.

संबंधित समाचार