बिहार में 40 मरीज़ों की मौत

  • 3 फरवरी 2011
मृतक के साथ परिजन

बिहार के सभी छह सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण तीन दिन में कम से कम 40 मरीज़ों की मृत्यु हो गई है.

अस्पतालों में हालात बेहद ख़राब बताए जाते हैं. केवल पटना मेडिकल कॉलेज में अब तक 28 मरीज़ों की मौत हो गई है.

रविवार 30 जनवरी को गया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मारपीट की एक घटना के बाद एक विधायक की गिरफ़्तारी की मांग करते हुए वहाँ के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए.

उसके बाद राज्य के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जूनियर डॉक्टर भी हड़ताल में शामिल हो गए. बिहार में लगभग 1400 जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं.

हड़ताली डॉक्टरों की मांग है कि अस्पतालों में उनकी सुरक्षा की गारंटी संबंधी क़ानून बने और गया में जूनियर डॉक्टरों के साथ मारपीट के ज़िम्मेदार विधायक सुरेन्द्र यादव को गिरफ़्तार करके उनके ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाए.

इनका आरोप है कि एक महिला के इलाज में लापरवाही बताकर विधायक ने अपने अंगरक्षकों के द्वारा वहाँ जूनियर डॉक्टरों पर गोली चलवा दी, जिससे दो डॉक्टर ज़ख़्मी हो गए.

दोनों अंगरक्षकों को न सिर्फ निलंबित कर दिया गया है, बल्कि उन्हें गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया गया है.

इस कार्रवाई से नाराज़ बिहार पुलिस मेंस एसोसिएशन ने राज्य भर में अपने पुलिस जवानों की हड़ताल की धमकी दे दी है.

उधर गिरफ़्तारी से बचने के लिए राष्ट्रीय जनता दल के विधायक सुरेन्द्र यादव खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं.

इस बीच घटना से जुड़े तीन पक्षों की तरफ़ से छह प्राथमिकियां ( एफ़आईआर) दर्ज की गई हैं.

जूनियर डॉक्टरों पर भी पुलिस जीप में आग लगाने और मारपीट करने का आरोप है.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे का कहना था, ‘‘पूरी जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई ज़रूर होगी लेकिन जूनियर डॉक्टर और पुलिस जवान- दोनों से जुड़े संगठनों से अपील है कि हड़ताल का सहारा लेकर आम लोगों की तकलीफें न बढ़ाएं.’’

दरअसल राज्य सरकार दुविधा में फंस गई है क्योंकि दोनों पक्ष अपना दबाव बढ़ा रहे हैं. उधर बड़े सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा -सेवाओं पर बुरा असर पड़ने से वहाँ भर्ती मरीज़ों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार