अपह्त जवानों को रिहा करेंगे माओवादी

  • 8 फरवरी 2011
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Image caption छत्तीसगढ़ में माओवादियों का ज़बर्दस्त प्रभाव है

माओवादी 25 जनवरी को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर इलाके से अगवा किये गए सभी पांच पुलिस के जवानों को रिहा करने को तैयार हो गए हैं.

इस संबंध में मंगलवार को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी की पूर्वी बस्तर क्षेत्रीय कमिटी की प्रवक्ता नीति ने पहले से रिकार्ड किए गए बयान में कहा है कि सभी जवानों को जन अदालत में पेश किया गया जिसमे सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे.

जन अदालत में फैसला लिया गया है कि सभी बंधक बनाए गए जवानों को रिहा कर दिया जाए.

माओवादियों नें पहले ही कहा था कि उनके कब्ज़े में जवानों को युद्ध बंदी का दर्जा प्राप्त है और उन्हें भोजन और चिकित्सा मुहैया कराई जा रही है.

माओवादियों का कहना है कि इस मामले में उन्होंने मानवाधिकार कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश से भी बात की है जिन्होंने जवानों को छोड़ देने की अपील भी की है.

नीति ने कहा, " इन सभी जवानों को नारायणपुर के झारा गाँव से जनमुक्ति छापामार सेना नें गिरफ्तार किया है. उसके बाद इन्हें जन अदालत में पेश किया गया. इस जन अदालत में हज़ारों की संख्या में ग्रामीण मौजूद थे. जवान इस बात पर सहमत हो गए हैं कि वह रिहा होने के बाद पुलिस की नौकरी छोड़ देंगे. इसके अलावा उन्होंने बस्तर में आदिवासियों पर हो रहे पुलिसिया दमन पर खेद भी व्यक्त किया है."

माओवादियों नें जवानों की रिहाई के लिए पहले ही 11 सूत्री मांगे रखी हैं जिसमे प्रमुख रूप से नक्सलियों के खिलाफ चल रहे आपरेशन ग्रीन हंट को बंद करने, बस्तर के इलाके में स्कूलों को सुरक्षा बलों से मुक्त कराने, अर्द्ध सैनिक बलों को वापस बुलाने, निर्दोष लोगों को रिहा करने जैसी मांगे शामिल हैं.

इसके अलावा माओवादियों की मांग है कि नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के इलाके में सेना के प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्र को रद्द किया जाए.

इसके अलावा माओवादियों का कहना है कि जिस वक़्त जवानों को रिहा किया जा रहा हो तो वहां पर कोई पुलिस बल मौजूद नहीं रहे और सुरक्षा बलों के जवानों को थानों और बैरक में एक दिन के लिए वापस बुला लिया जाए.

माओवादियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वो भी इस दौरान पुलिस पर हमला नहीं करेंगे.

पूछे जाने पर नारायणपुर के एसपी मयंक श्रीवास्तव का कहना है कि पुलिस खुद भी चाहती है की खूनखराबा ना हो और सभी जवानों को सुरक्षित छोड़ दिया जाए. उन्होंने कहा कि रिहाई के वक़्त कोई पुलिस बल उस इलाके में मौजूद नहीं होगा.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा है कि सरकार के दरवाज़े वार्ता के लिए हमेशा से खुले हैं.

माओवादियों की पहल का स्वागत करते हुए उन्होंने मंगलवार को आश्वासन दिया है कि रिहाई के वक़्त सुरक्षा बल वहां मौजूद नहीं रहेंगे और ना ही जिनके सामने जवानों को रिहा किया जाएगा उनपर कोई कार्यवाही की जाएगी.

सरकारी सूत्रों का कहना है कि रमन सिंह ने मानवाधिकार कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश से भी जवानों की सकुशल रिहाई के लिए बात की. खबरें हैं कि मुख्यमंत्री से बात करने के बाद स्वामी अग्निवेश नें जवानों को रिहा करने के लिए मध्यस्थता की है.

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