जनगणना प्रक्रिया का दूसरा दौर शुरु

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भारत में हर दस साल पर होने वाली जनगणना की प्रक्रिया का दूसरा चरण बुधवार से शुरु हो रहा है. इस विशाल प्रशासनिक कवायद का पहला चरण 2010 में हुआ था.

पहले चरण में घर-घर जाकर गणना की गई थी जिसमें घरों में बिजली-पानी जैसी सुविधाओं की उपल्ब्धता की जानकारी भी जुटाई गई है.

जबकि दूसरे दौर में बेघर समेत कई अन्य श्रेणियों में गणना होगी. ये काम 28 फ़रवरी तक पूरा होना है.

सर्वेक्षक रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और रास्ते की पटरियों पर बेघर लोगों की भी गिनती करेंगे. इस बार महिला और पुरुष वर्ग के अलावा तीसरे लिंग का भी कॉलम रहेगा. ये उन लोगों के लिए होगा जो ख़ुद को न पुरुष मानते हैं और न महिला.

अंडमान निकोबार द्वीप समूह जैसे इलाकों में ऐसी जनजातियां रहती हैं जो इंसानों से मेलजोल नहीं रखतीं और उनसे सम्पर्क रखना भी प्रतिबंधित है. ऐसे लोगों की गिनती के लिए भी अलग से प्रावधान किया गया है.

पहली बार जनगणना का काम 1872 में हुआ था जिसके बाद से भारत में लगातार हर दस साल बाद ये काम होता रहा है.भारत की 100 करोड़ से ज़्यादा आबादी को देखते हुए जनगणना का काम किसी चुनौती के कम नहीं है. आज़ादी के बाद ये सातवीं जनगणना है.

जाति जनगणना बाद में

जनगणना के अलावा इस बार पहली दफ़ा राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर (एनपीआर) भी तैयार किया जाएगा.इसी रजिस्टर में इकट्ठा की गई जानकारी से आनेवाले समय में 15 वर्ष की उम्र से ऊपर के हर भारतीय नागरिक को एक यूनीक आईडेंटिटी नंबर यानि यूआईडी जारी किया जाएगा.ये अप्रैल से जून तक चलेगा.

इस बार जाति जनगणना भी होगी और ये काम अलग से जून से सितंबर तक होगा. जनगणना की पूरी प्रक्रिया पर करीब छह हज़ार करोड़ का खर्च आएगा.

लोगों में इस प्रक्रिया को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए विशेष पब्लिसिटी अभियान भी चलाया जा रहा है.भारत की गिनती विश्व के सबसे ज़्यादा आबादी वाले देशों में होती है. 2001 की जनगणना में जनसंख्या 1.02 अरब थी.

जनगणना के ज़रिए ही सरकार को समाज के बारे में अहम जानकारियाँ मिलती हैं- जैसे देश में कितने पुरुष या महिलाएँ हैं, युवा- बुज़ुर्ग कितने हैं या किस समुदाय से हैं.

ये आँकड़ें विभिन्न योजनाएँ बनाने में सरकार के लिए मददगार साबित होते हैं. इसी आधार पर योजनाओं का सामाजिक, आर्थिक या राजनीतिक पहलू तय किया जाता है.

जनगणना के वक्त इकट्ठा की गई जानकारी को किसी भी अदालत में पेश नहीं किया जा सकता. ये प्रावधान इसलिए रखा गया है कि देश का हर नागरिक निडर निर्भीक होकर अपने विषय में हर तरह की जानकारी दे सके.

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