दार्जीलिंग में हड़ताल, जनजीवन प्रभावित

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दार्जीलिंग में मंगलवार को हुई हिंसा के बाद बुधवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण जन-जीवन प्रभावित हुआ है.

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ने बुधवार सुबह छह बजे से हड़ताल का आह्वान किया हुआ है. अधिकारियों का कहना है कि नगर में सब कुछ ठप्प पड़ा है.

दार्जीलिंग इलाक़े में नेपाली बोलने वाले गोरखा समुदाय के लिए गोरखा जनमुक्ति मोर्चा अगल राज्य की माँग करता रहा है.गुट का कहना है कि मंगलवार को पुलिस गोलीबारी में उसके दो समर्थकों की मौत हो गई और वो इसी के विरोध में हड़ताल कर रहा है.

वहीं पुलिस के मुताबिक गोली तब चलानी पड़ी जब सिबचू चाय बागान में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के तीन हज़ार समर्थकों की भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया.

पश्चिम बंगाल के पुलिस अधिकारी सुरोजीत कर पुरोकायस्थ ने बताया, “हमारी एक महिला होमगार्ड को बुरी तरह घायल कर दिया गया. हम पर गोली भी चलाई गई. चाय बागान पर हालात काबू से बाहर हो रहे थे. स्थानीय मजिस्ट्रेट ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गोली चलाने का आदेश दिया था.”

लेकिन गोरखा जन मोर्चा का कहना है कि भीड़ ने नहीं उकसाया था फिर भी गोली चलाई गई.

जीजेएम के महासचिव रोशन गिरी कहते हैं, “हमारे समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से भूख हड़ताल कर रहे थे और हमने बिना हिंसा भड़काने के इरादे से रैली निकाली. पुलिस ने लोगों को तितर-बितर करने की कोशिश की और गोली चलाई.”

तनाव का माहौल

गोलीबारी के बाद हुई झड़पों में सात पुलिसकर्मियों समेत 20 लोग घायल हो गए.जैसे ही मंगलवार को गोलीबारी की ख़बर दार्जीलिंग तक पहुँची, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने सरकारी इमारतों, बसों और कई कारों को आग लगा दी.दार्जीलिंग टेलीफ़ोन एक्सचेंज समेत कई सरकारी इमारतों को जला दिया गया.

हालांकि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के रोशन गिरी हिंसा भड़काने के आरोप को ग़लत बताते हैं और दार्जीलिंग के लोगों से हिंसा बंद करने की अपील की है.

सिबचू दार्जीलिंग के निचले हिस्से में है जहाँ जीजेएम अपना प्रभुत्व बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन पुलिस का कहना है कि वो इलाक़े में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा की गतिविधियों को सीमित करना चाहती थी क्योंकि इन गतिविधियों की वजह से नेपाली गोरखा और स्थानीय बंगाली और आदिवासी लोगों के बीच झड़पें हो सकती थीं.

पश्चिम बंगाल पुलिस प्रमुख का कहना है कि स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.हिंसा भड़कने के बाद मंगलवार रात को बंगाल सरकार को सेना का सतर्क कर दिया था और अतिरिक्त पुलिसबल तैनात कर दिया.

हिंसा और अनिश्चितकालीन हड़ताल से चाय बागानों और पर्यटन पर असर पड़ने की आशंका है.इन्हीं से दार्जीलिंग की अर्थव्यवस्था चलती है.

गोरखा समुदाय के लोग अलग राज्य की माँग अस्सी के दशक से कर रहे हैं. इस संदर्भ में हुए समझौते के बाद उन्हें काफ़ी स्वायत्ता दी गई जिसके बाद 1988 में ये अभियान बंद हो गया.

लेकिन तीन साल पहले गोरखा समुदाय के कट्टरपंथी लोगों ने अभियान फिर से शुरु कर दिया. उन्हें लगता है कि समझौता ठीक से लागू नहीं हुआ है.

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