समुद्री लुटेरे मुंबई पुलिस के कब्ज़े में

समुद्री लुटेरे
Image caption पूरी दुनिया मे समुद्री लुटेरों का आतंक बढ़ा है

लक्षद्वीप के पास पकड़े गए 28 सोमाली समुद्री लुटेरों को आज भारतीय नौसेना और कोस्टगॉर्ड ने मुंबई पुलिस को सौंप दिया.

छह फ़रवरी को सुबह उन्हें दोनों तरफ़ से हुई गोलीबारी के बाद इन लुटेरों को लक्षद्वीप के पास पकड़ा गया था.

मीडिया को सुबह समुंद्र में स्थित कोस्टगॉर्ड्स के जहाज़ पर ले जाया गया. जहाज़ के बगल में प्रांतालय 11 नाम की मछली पकड़ने वाली नाव खड़ी थी जिसे लुटेरों ने अगवा किया था.

जहाज़ में एक तरफ़ समुद्री लुटेरे बैठे थे तो दूसरी ओर थाईलैंड और बर्मा के वो लोग जिन्हें लुटेरों ने बंधक बनाया हुआ था.

पास ही एक मेज़ पर लुटेरों से बरामद हुई चीज़ें थीं – मोबाईल, खाली गोलियाँ, सीडी, पर्स, आईडी कार्ड्स आदि. उन्हें अपने पास रखी हुई एके47 राईफ़लें और रॉकेट लांचर पकड़े जाने से पहले समुद्र में फेंक दिए थे.

इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए कोस्टगॉर्ड के आईजी एसपीएस बसरा ने बताया कि जिस तरह की शक्ति का इस्तेमाल लुटेरों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है उससे पता चलता है कि उनकी ताकत तेज़ी से बढ़ रही है और वो बहुत खौफ़नाक है.

उनका कहना था कि एक से नौ फ़रवरी के बीच 10 जहाज़ों पर हमले हो चुके हैं जिसमें से दो कामयाब रहे हैं.

ये पूछे जाने पर कि उस इतालवी जहाज़ के बारे में क्या ख़बर है जिसमें 22 लोग सवार हैं और उसे अगवा कर लिया गया है, इस पर उनका कहना था कि ये जहाज़ सोमालिया की ओर बढ़ रहा है.

इन 22 लोगों में 17 भारतीय भी हैं.

इस दौरान हमारी बातचीत पकड़े गए एक लुटेरे से भी हुई. उसने अपना नाम मैक बताया और कहा कि उसकी उम्र 26 साल है. अधिकारियों के मुताबिक इन लोगों के ढेर सारे नाम होते हैं. पूरे गुट में शायद मैक को ही अंग्रेज़ी आती थी.

सभी लुटेरों की तरह उसका चेहरा कपड़े से ढंका हुआ था. उसके कपड़े गंदे थे और हाथ पीछे की ओर बंधे थे.

लुटेरे का कहना था कि उन्हें पता है कि ये गंदा काम है लेकिन उन्होंने ये पैसों के लिए किया. उनके पिता की मौत हो चुकी और माँ आसले सोमालिया की राजधानी मोगादिशु में हैं.

मैक ने कहा, ‘किसी ने मुझसे कहा इस काम के लिए मुझे धन मिलेगा.’

जब हमने पूछा कि कितना धन, तो मैक का कहना था कि उससे कहा गया था कि इतना पैसा जिससे कि उसका भविष्य बेहतर हो जाए.

मैक के मुताबिक सोमालिया की राजधानी मोगादिशु में पहले उसकी एक दुकान थी जहाँ वो दूध, चावल जैसी चीज़ें बेचता था.

मैक के मुताबिक उन्होंने ये काम मात्र 15 दिन पहले ही शुरू किया है और इससे पहले ये काम नहीं किया. उन्होंने कहा कि वो भारतीय सरकार से विनती करता है कि वो सोमालियाई सरकार से बातचीत करे ताकि उन्हें सोमालियाई अदालत ले जाया सके.

उधर अधिकारियों का कहना है कि जहाँ बंधकों को जल्द ही उनके देशों के राजदूत छुड़ा ले जाएंगे, इन लुटेरों को भारतीय कानून के तहत लंबी सज़ा हो सकती है. एक अफ़सर का कहना था कि लुटेरों का भविष्य अंधकारमय है.

संबंधित समाचार