केंद्र के साथ बातचीत सकारात्मक: उल्फ़ा

अरबिंद राजखोवा
Image caption राजखोवा का गुट बातचीत कर रहा है लेकिन बरुआ गुट इसके विरोध में है

असम के प्रतिबंधित संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (उल्फ़ा) का कहना है कि केंद्र सरकार के साथ पहले दौर की बातचीत सकारात्मक रही है.

बुधवार को दिल्ली में उल्फ़ा का आठ सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल गृह मंत्री पी चिदंबरम से मिला. बाद में उन्होंने गृह सचिव जीके पिल्लई के नेतृत्व में 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की.

बैठक के बाद नई दिल्ली के प्रेस क्लब में हुए एक संवाददाता सम्मेलन में उल्फ़ा के विदेश सचिव शशाधर चौधरी ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात करेगा.

उन्होंने कहा, "केंद्र के साथ बातचीत सकारात्मक रही है. हम संघर्ष का हल बातचीत के माध्यम से निकालना चाहते हैं." शशाधर चौधरी ने स्पष्ट किया कि अभी ये बातचीत भरोसा बहाल करने की कोशिश है और आगे की बातचीत का एजेंडा बाद में तय होगा.

पिछले 31 वर्षों में पहली बार केंद्र के साथ उल्फ़ा की सीधी बातचीत हुई है. आठ सदस्यीय उल्फ़ा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उसके ‘अध्यक्ष’ अरबिंद राजखोवा ने किया.

उल्फ़ा के तथाकथित कमांडर इन चीफ़ परेश बरूआ ने शाँति प्रकिया को ठुकराते हुए अपना संघर्ष जारी रखने का फ़ैसला किया है. हालाँकि शशाधर चौधरी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि संगठन उनसे संपर्क में है.

बातचीत शुरू होने से पहले कुछ मतभेदों को दूर करने के लिये राजखोवा और उनके साथियों ने असम के मुख्य मंत्री तरूण गोगोई से मुलाक़ात की. उन्होंने उम्मीद जताई कि तीन दशक पुराने इस संघर्ष का जल्द हल निकल आएगा.

गोगोई ने परेश बरूआ को यह कहते हुए आड़े हाथों लिया कि हमेशा हंगामा खड़ा करना उनकी आदत रही है. उनका कहना था कि परेश बरूआ के लोगों के लिए आतंक जीवन का हिस्सा बन चुका है लेकिन सरकारी बल उनसे निपटने में सक्षम है.

उल्फ़ा का इतिहास

Image caption उल्फ़ा के कई सदस्यों को हाल ही में रिहा किया गया है जिससे कि बातचीत का माहौल बन सके

उल्फ़ा की स्थापना असम में ग़ैर कानूनी ढ़ंग से बसने वाले वालों को रोकने के लिए 1979 में हुई थी. आरोप है कि उसने कई सालों तक जबरन वसूली, अपहरण और हत्याओं का सिलसिला जारी रखा.

1992 में उसमें फूट पड़ गई और आधे से ज़्यादा लोगों ने आत्म समर्पण कर दिया था.

गत पाँच फ़रवरी को उल्फ़ा ने घोषणा की थी कि वह असम के लोगों की भावनाओं के सम्मान करते हुए केद्र से बिना शर्त बातचीत शुरू करेगी.

हालांकि संगठन का एक धड़ा बातचीत के पक्ष में अब भी नहीं है और उन्होंने पिछले दिनों अपने ही संगठन के नरमपंथी सहयोगियों और केंद्र सरकार के बीच वार्ता को भंग करने की धमकी दी थी.

उल्फ़ा के कट्टरपंथी धड़े की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था वे अपनी लड़ाई जारी रखने के प्रति दृढ़ संकल्प हैं.

उल्फ़ा के मुख्य कमांडर परेश बरुआ की अगुवाई वाले कट्टरपंथी धड़े के प्रसार सचिव अनिरुद्ध दुहोतिया ने बयान जारी कर कहा था कि असम की स्वतंत्रता की लड़ाई जारी रखने के लिए उनके पास पर्याप्त संख्या है.

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