माओवादियों ने जवानों को रिहा किया

  • 11 फरवरी 2011
माओवादी (फाइल चित्र) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption रिहाई के विषय में विवरण अभी आ रहे हैं

छत्तीसगढ़ राज्य में अगवा किए गए पुलिस के पाँच जवानों को माओवादियों ने सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारों की मौजूदगी में रिहा कर दिया है.

सभी जवानों को बस्तर के अबूझमाड़ के कोंडा ब्लॉक में तरियामेटा गांव के पास रिहा किया गया.

इसके बाद वहाँ एक आमसभा हुई.

इस रिहाई के लिए दिल्ली से स्वामी अग्निवेश और गौतम नौलखा सहित पाँच सामाजिक कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे थे. उनके साथ कुछ पत्रकार भी थे.

यह इलाका पूरी तरह माओवादियों के नियंत्रण वाला है जहां माओवादियों की 'जनताना' सरकार का प्रभाव है. तरियामेटा गांव जंगलों के बीच बसा है.

जवानों की रिहाई तक पुलिस और माओवादियों ने 48 घंटे के युद्ध विराम की घोषणा भी की थी.

युद्ध विराम

माओवादियों की जनमुक्ति छापामार सेना ने 25 जनवरी को नारायणपुर ज़िले के माराबेडा के इलाक़े से इन सभी जवानों का अपहरण कर लिया था.

उस वक़्त वे वे यात्री बस में बैठ कर ज़िला मुख्यालय आ रहे थे.

बाद में माओवादियों ने बयान जारी कर कहा था कि सभी जवान सुरक्षित हैं और उन्हें युद्धबंदी का दर्जा प्राप्त है. उनकी रिहाई के एवज़ में माओवादियों ने कुछ शर्तें भी रखी थीं.

माओवादियों ने घोषणा की थी कि वे पुलिसकर्मियों को स्वामी अग्निवेश, गौतम नौलखा और मीडियाकर्मियों के सामने रिहा करेंगे. इस बीच माओवादियों की उत्तर क्षेत्रीय कमिटी के प्रवक्ता प्रभात ने पहले से रिकार्ड किए गए एक बयान में माओवादियों की शर्तों के बारे में बताते हुए कहा है कि 10 फ़रवरी से 12 फ़रवरी की मध्यरात्रि तक पुलिस और सुरक्षा बल के जवानों को थानों और बैरकों में वापस बुला लिया जाए.

प्रभात का कहना था कि इस दौरान जनमुक्ति छापामार सेना के लोग भी पुलिसवालों पर हमला नहीं करेंगे.

राज्य सरकार ने इन शर्तों को स्वीकार कर लिया था.

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