नक़्शे पर गरमाई राजनीति

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Image caption पीडीपी से कहा गया है कि वो जल्द से जल्द इस नक़्शे को वापिस ले

भारत प्रशासित कश्मीर के प्रमुख विपक्षी दल पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पी डी पी) द्वारा हाल ही में राज्य के एक पुराने नक़्शे में कश्मीर के कुछ हिस्से को चीन में दिखाए जाने को लेकर विवाद गहरा रहा है.

राज्य में गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही नॅशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और सहयोगी दल कांग्रेस दोनों ने इसपर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

पीडीपी ने पिछले सप्ताह कश्मीर मुद्दे के हल के लिए अपनी ओर से एक मसौदा पेश किया था. इसके तहत जम्मू कश्मीर (भारत और पाकिस्तान) में सीमाओं को अप्रासंगिक करने का सुझाव देते हुए परंपरागत व्यापार मार्गों को खोलने की बात कही गई है.

इस योजना के तहत राज्य को मुक्त आर्थिक क्षेत्र बताते हुए नक़्शे में भारत, पाकिस्तान और चीन के नियंत्रण क्षेत्र को अलग-अलग रंगों में दिखाया गया है. भारत वाला हिस्सा केसरी है, पाकिस्तान का हिस्सा हरा और चीन वाला लाल रंग में दिखाया गया है.

'क़ुबूल नहीं'

इस नक्शे में अक्साई चिन और काराकोरम के इलाके को चीन का हिस्सा दिखाया गया था.

इसके अलावा भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में शांति बहाल करने के लिए कुछ और कदम भी सुझाए गए थे, जैसे रक्तपात और दमन पर रोक, राजनितिक कैदियों और बेगुनाहों की रिहाई और सेना की वापसी.

पीडीपी के मसौदे में दिखाए गए नक्शे पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हमारी रियासत का कोई भी हिस्सा इस तरह तोहफ़े के तौर पर दे दिया जाए यह मुझे नहीं लगता किसी को भी कबूल होगा. यह एक खतरनाक चीज़ है जिस के बारे में सोचना ज़रूरी है."

राज्य में गठबंधन सरकार के सहयोगी दल कांग्रेस ने भी इसे अस्वीकार्य बताया है.

'गलती सुधारी जाए'

कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने दिल्ली में कहा, "भारतीय संसद ने फ़रवरी 1994 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था की जम्मू-कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है. इस प्रस्ताव में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर भी भारत के विचार दर्ज हैं. इस सन्दर्भ में पीडीपी को यह सलाह दी जाती है की वो बिना कोई स्पष्टीकरण दिए इस नक़्शे को जल्द से जल्द वापिस ले."

उधर भारत के गृहमंत्री पी चिदम्बरम ने भी कहा है की अगर यह गलती है तो इस को जल्द सुधारा जाए नहीं तो इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

इस बीच पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने केंद्र पर उलट वार करते हुए कहा है कि गृहमंत्री इस मामले में चिंता ज़ाहिर करने के बजाय चीन की ओर से भारत पर बनाए जा रहे दबाव का जवाब दें. उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी रुप में चीन के दबाव में नहीं आना चाहिए.

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