आंध्र प्रदेश: राज्यपाल का माइक उखाड़ा

तेलंगाना
Image caption पृथक तेलंगाना की मांग को लेकर ज़बर्दस्त आंदोलन चल रहा है.

आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य के लिए चल रहे आंदोलन ने आज गंभीर मोड़ ले लिया जब तेलंगाना समर्थकों ने असहयोग आंदोलन के तहत प्रशासन के कामकाज को ठप करने की कार्रवाई शुरु कर दी.

इस अभियान के तहत गुरुवार को तेलंगाना राष्ट्र समिति के सदस्यों ने विधान सभा में बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन के संबोधन को रोकने की कोशिश की.

एक विधायक ने राज्यपाल की कुर्सी के निकट जाकर उनके भाषण की कॉपी को खींचने का प्रयास किया और उनका माइक उखाड़ डाला.

सदन के बाहर विधान सभा परिसर में हुई एक हिंसक घटना में तेलंगाना विरोधी विधायक और लोकसत्ता पार्टी के अध्यक्ष जय प्रकाश नारायण पर हमला कर दिया गया.

राष्ट्रपति शासन की मांग

पुलिस के अनुसार ये हमला तेलंगाना राष्ट्र समिति के एक विधायक और एक अन्य विधायक के ड्राइवर ने किया है.

इस हमले से बुरी तरह घबराए जय प्रकाश नारायण ने कहा कि राज्य में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि विधानसभा के अंदर भी विधायक सुरक्षित नहीं. उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने की मांग की.

इन दोनों घटनाओं की हर तरफ कड़ी निंदा हो रही है. मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी, विपक्ष के नेता चंद्रबाबू नायडू और दूसरे कई मंत्रियों सहित वरिष्ठ विधायकों ने भी जय प्रकाश नारायण पर हमले की कड़ी निंदा की है.

दूसरी ओर तेलंगाना राष्ट्र समिति के दो विधायकों टी हरीश राव और केटी रामाराव ने कहा कि उनकी पार्टी ने राज्यपाल के संबोधन का बहिष्कार किया है क्योंकि राज्यपाल हमेशा ही तेलंगाना राज्य का विरोध करते हैं और केंद्र को गलत रिपोर्ट भेज कर उसे गुमराह करते हैं.

तेलंगाना राज्य का विधेयक

मुख्य विपक्षी दल तेलुगुदेशम के तेलंगाना गुट ने भी असहयोग अभियान का समर्थन किया है. दल के नेता नगम जनार्दन रेड्डी ने मांग की है कि संसद के बजट सत्र में तेलंगाना राज्य का विधेयक लाया जाए.

तेलंगाना राज्यों के असहयोग अभियान का पूरे क्षेत्र पर असर पड़ा है, क्योंकि लरकारी कर्मचारी भी इसमें शामिल हैं.

टीआरएस और तेलंगाना संयुक्त कार्य समिति सहित कई संगठनों ने आम जनता से आह्वान किया है कि जब तक तेलंगाना राज्य स्थापित न हो जाए वो बसों में बिना टिकट यात्रा करें और सरकार को कोई टैक्स न दें.

इधर ओसमानिया विश्वविद्यालय परिसर में भी गुरुवार को पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हुई.

दबाव बनाने की कोशिश

साथ ही निज़ामाबाद में हजामत बनानेवालों और कपड़े धोने वालों ने अपने घरों और दुकानों के आगे बोर्ड लगा दिए हैं कि कि वो अब किसी तेलंगाना विरोधी का काम नहीं करेंगे. मज़दूरों ने भी तेलंगाना विरोधियों के लिए काम करने से इंकार कर दिया है.

तेलंगाना राजनीतिक संयुक्त एक्शन कमिटी (जेएएन) चाहती है कि केंद्र बजट सत्र के दौरान अलग राज्य संबंधी विधेयक संसद में पेश करे और इसी उद्देश्य से दबाव बनाने के लिए अहयोग आंदोलन का आह्वान किया गया है.

जेएएन के संयोजक ए कोदंदरम के अनुसार तेलंगाना क्षेत्र के सरकारी कर्मचारी, शिक्षक और राज्य के अन्य संस्थानों के कर्मचारी गुरुवार से इस आंदोलन में हिस्सा लेंगे.

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