उड़ीसा सरकार ने कार्रवाई रोकी

विनील कृष्ण इमेज कॉपीरइट Sibabrata Das
Image caption जिलाधिकारी विनील कृष्ण की तलाश में अभियान छेड़ा गया है

अपहृत ज़िलाधीश आर विनील कृष्ण की रिहाई के लिए माओवादियों की दो मांगों में से एक को स्वीकार करते हुए उड़ीसा सरकार ने माओवादियों के ख़िलाफ़ राज्य में चल रही कार्रवाई को तत्काल रोकने की घोषणा की है.

राज्य के गृह सचिव यूएन बेहरा ने पत्रकारों को बताया, "मलकानगिरी ज़िले सहित पूरे राज्य में गश्त और तलाशी अभियान को रोकने के निर्देश दे दिए गए हैं."

मलकानगिरी ज़िले के ज़िलाधीश आर विनील कृष्ण और एक इंजीनियर का बुधवार की शाम माओवादियों ने अपहरण कर लिया था.

उन्होंने एक इंजीनियर को रिहा करते हुए सरकार के सामने दो शर्तें रखीं थीं, एक यह कि माओवादियों के ख़िलाफ़ आंध्र प्रदेश और उड़ीसा पुलिस की कार्रवाई तत्काल बंद हो और राज्य में अर्धसैनिक बलों के शिविर बंद किए जाएं और दूसरा यह कि राज्य की जेलों में बंद माओवादियों को रिहा किया जाए.

माओवादियों ने अपनी शर्तें मानने के लिए शुक्रवार की शाम तक की समय सीमा तय की है.

अपहरण की घटना उस समय हुई जब ज़िलाधीश दो इंजीनियरों के साथ चित्रकोंडा के दुर्गम इलाक़े के एक गाँव में जनसंपर्क शिविर के बाद वापस लौट रहे थे.

राज्य में किसी जिला मजिस्ट्रेट को अगवा किया जाने कि ये पहली घटना है.

यह अपहरण ऐसे समय में हुआ है जब गृह मंत्री पी चिदंबरम देश के 60 माओवादी प्रभावित ज़िलों के जिलाधिकारियों के साथ दो दिन बाद वीडियो कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं.

बातचीत का प्रस्ताव

माओवादियों की दो मांगों में से एक को स्वीकार करते हुए राज्य के गृहसचिव बेहरा ने उम्मीद जताई है कि माओवादी शुक्रवार को ज़िलाधीश और इंजीनियर को रिहा कर देंगे.

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार माओवादियों से समय सीमा बढ़ाए जाने की अपील करेगी, उन्होंने कहा, "हमें लगता है कि समय सीमा बढ़ाए जाने की अपील करने की आवश्यकता नहीं है."

उन्होंने कहा, "हमने माओवादियों को बातचीत का एक खुला प्रस्ताव दिया है. वे चाहें तो ज़िला स्तर पर या फिर राज्य के गृह विभाग से बातचीत कर सकते हैं."

गृहसचिव का कहना था कि माओवादी चाहें तो सीधी बातचीत कर सकते हैं या फिर अपने किसी प्रतिनिधि के ज़रिए बातचीत कर सकते हैं.

बीबीसी से हुई बातचीत में माओवादियों के क़रीबी माने जाने वाले नेता गदर ने जिलाधिकारी विनील कृष्ण को रिहा करने की अपील की है.

इससे पहले मध्यस्थता करके बस्तर में छत्तीसगढ़ पुलिस के पाँच जवानों को रिहा करवाने में अहम भूमिका निभाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश से भी राज्य सरकार ने संपर्क किया है.

स्वामी अग्निवेश ने माओवादियों से अपील की है कि वे ज़िलाधीश और दूसरे अधिकारी को प्रताड़ित न करें और उनकी रिहाई की समय सीमा बढ़ाएँ.

उन्होंने कहा है कि वे ज़िलाधीश और इंजीनियर की रिहाई के पूरे प्रयास करेंगे.

मलकानगिरी को माओवादी विद्रोहियों का गढ़ माना जाता है.

इस इलाके में पहले भी माओवादियों ने सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाया है.

केंद्र की सहायता

Image caption मलकानगिरी को माओवादियों का गढ़ माना जाता है

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार राज्य सरकार की घोषणा से पहले केंद्र सरकार की ओर से ये संकेत दे दिए गए थे कि राज्य में माओवादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई स्थगित की जा सकती है.

हालांकि उन्होंने मलकानगिरी के अलावा अन्य इलाक़ों में माओवादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई स्थगित करने की संभावना से इनकार किया था लेकिन राज्य ने पूरे राज्य में कार्रवाई स्थगित कर दी है.

केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लई ने माओवादियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकार को हर संभव मदद देती रही है और भविष्य में भी वह हर तरह की सहायता देने के लिए तैयार है.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सारी परिस्थितियों से पूरी तरह से वाकिफ़ है और वह अधिकारियों की रिहाई के लिए हर संभव क़दम उठा रही है.

इससे पहले गुरुवार को राज्य विधानसभा में इस मामले को लेकर विपक्षी दल के सदस्यों ने जमकर हंगामा किया.

संबंधित समाचार