मध्यस्थ भुवनेश्वर पहुँचे, कुछ शुरुआती धक्के

  • 20 फरवरी 2011
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Image caption अपहरण के विरोध में मलकानगिरी में हज़ारों आदिवासियों ने प्रदर्शन किया और कुछ उनकी खोज में भी निकल पड़े हैं

उड़ीसा के मलकानगिरी ज़िले से चार दिन पहले अगवा किए गए ज़िलाधिकारी आरवी कृष्णा और जूनियर इंजीनियर पबित्र माझी को छुड़ाने के लिए माओवादियों की ओर नियुक्त मध्यस्थ रविवार सुबह हैदाराबाद से भुवनेश्वर पहुँच गए हैं.

हैदराबाद के मानवाधिकार कार्यकर्ता जी हरगोपाल और संबलपुर विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफ़ेसर आरएस राव ने भुवनेश्वर पहुँचकर पत्रकारों से बातचीत की है.

उनका कहना था, "हम इस मामले पर इस समय कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं. हम पहले सरकार से बात करना चाहेंगे. हम इस समय ऐसा कोई दबाव नहीं डाल रहे कि किस माओवादी को रिहा किया जाए या न किया जाए."

माना जा रहा है कि दोनों मध्यस्थ पहले मुख्य सचिव बीके पटनायक और गृह सचिव यूएन बेहरा से बातचीत होगी और फिर संभावना है कि वे मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे.

बीके पटनायक के अनुसार अगवा किए गए दोनों अधिकारी सुरक्षित हैं. शनिवार को नवीन पटनायक ने एक बार फिर माओवादियों से अपील की थी कि कृष्णा और माझी को रिहा किया जाए और उन्हें कोई क्षति न पहुँचाई जाए.

इस बीच मलकानगिरी में लगभग सात हज़ार आदिवासियों ने दोनों अधिकारियों की रिहाई के लिए प्रदर्शन किया और कुछ नेता माओवादियों से बात करने और दोनों अगवा लोगों को खोजने जंगल में भी गए हैं. कृष्णा उस इलाक़े में आदिवासियों के लिए कल्याणकारी नीतियाँ चलाने के लिए काफ़ी लोकप्रिय हैं.

बातचीत को प्रारंभिक धक्का?

कृष्णा और माझी को बुधवार शाम मलकानगिरी के दूरदराज़ के इलाक़े से अग़वा किया गया था.

माओवादी ने उन्हें छोड़ने के बदले में अपनी मांगे सामने रखी थीं और इसके लिए 48 घंटे की समयसीमा दी थी. सामाजिक कार्यकर्ताओं की अपील पर इस समयसीमा को बढ़ा दिया गया था.

माओवादियों की पहली माँग कि 'ऑपरेशन ग्रीन हंट' 24 घंटे के भीतर रोक दिया जाए, पहले ही मानी जा चुकी है.

सूत्रों के अनुसार पहले एक लंबी सूची सौपने के बाद माओवादियों ने सात प्रमुख माओवादियों या उनसे जुड़े लोगों की सूची सरकार को दी है जिनकी वे रिहाई चाहते हैं.

इनमें तीन नाम प्रमुख हैं - गांटी प्रसाद, श्रीरामुलु श्रीनिवास और सीपीआई (माओवादी) केंद्रीय समिति के सदस्य रामकृष्णा की पत्नी के पद्मा.

ग़ौरतलब है कि सरकार ने माओवादियों से जुड़े 13 लोगों की रिहाई के लिए मलकानगिरी और कोरपुट की अदालत में ज़मानत अर्ज़ी दाखिल की थी.

इनमें से दो - गांटी प्रसाद और के पद्मा (केंद्रीय समिति के सदस्य रामकृष्णा की पत्नी) की ज़मानत अर्ज़ी ठुकरा दी गई है.

तीसरा व्यक्ति श्रीरामुलु श्रीनिवास आंध्र की जेल में बंद हैं. मलकांनगिरी के कोर्ट में 24 फ़रवरी को पेश किया जाना है.

मानवाधिकार कार्यकर्ता हरगोपाल ने पहले कहा था कि गांटी प्रसाद और श्रीनिवास को रिहा करने से बातचीत का रास्ता आसान हो जाएगा. लेकिन गांटी प्रसाद की ज़मानत अर्ज़ी अदालत से ठुकराए जाने के बाद इसे बातचीत के प्रारंभिक दौर में एक घक्का माना जा रहा है.

उधर माओवादियों की ओर से मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को लिखे चार पन्नों के पत्र में माओवादियों ने उड़ीसा सरकार पर दमनकारी नीतियाँ अपनाने का आरोप लगाया था.

इस बीच आदिवासी बहुल मलकानगिरी ज़िले का संपर्क राज्य के दूसरे हिस्सों से कटा हुआ है क्योंकि माओवादियों ने कई सड़क-मार्गों पर लैंडमाइन बिछा दी हैं.

गुरुवार को राज्य विधानसभा में इस मामले पर विपक्षी दल के सदस्यों ने जमकर हंगामा किया था.

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