लीबिया: भारतीयों की मदद को मुस्तैद हुआ मंत्रालय

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Image caption लीबिया में बेनग़ाज़ी और राजधानी त्रिपोली के अलावा कई और शहरों से भी प्रदर्शनकारियों और सैनिकों के बीच संघर्ष की ख़बरें हैं.

लीबिया सहित समूचे मध्यपूर्व में जारी हिंसा के बीच भारतीयों की मदद के लिए भारत के विदेश मंत्रालय ने कोशिशें तेज़ कर दी हैं.

इन इलाकों में मौजूद भारतीयों की मदद के लिए मंत्रालय ने चौबीस घंटे चलने वाला एक नियंत्रण कक्ष बनाया है.

मंत्रालय की ओर से जारी वक्तव्य के अनुसार, ''24 घंटे कार्यरत इस तरह के नियंत्रण कक्ष त्रिपोली और साना में भी बनाए गए हैं. जिनके बारे में जानकारी मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद है.''

भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव की ओर से ट्विटर से मिली जानकारी के अनुसार बेनग़ाज़ी शहर में लगभग 300 भारतीय जिनमें नर्सें भी शामिल हैं.

उन्होंने लिखा है कि वहां मौजूद भारतीय राजदूत लगातार उनके संपर्क में हैं उनके सही सलामत होने की जानकारी ले रहे हैं.

'भारतीय नर्सें सुरक्षित'

निरुपमा राव के मुताबिक बेनग़ाज़ी मिस्र से नज़दीक है और इसके ज़रिए वहां फंसे लोगों को निकाला जा सकता है.

उन्होंने बताया कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपात स्थिति से निपटने और अपनी रणनीति तय करने के लिए एक सोमवार को एक बैठक भी की है.

निरुपमा राव के मुताबिक त्रिपोली स्थित भारतीय दूतावास को मज़बूत बनाया जा रहा है और एक अरबी भाषा का जानकार भी भारत से भेजा जाएगा.

राव ने लिखा है कि 1991 में कुवैत और 2006 में लेबनान में पैदा हुई आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए जो योजना तैयार की गई थी उसी आधार पर इस बार भी रणनीति बनाई जा रही है.

इस बीच लीबिया के बेनग़ाज़ी शहर में गोलीबारी के बीच फंसी 200 से ज़्यादा भारतीय नर्सों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा हिया गया है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश के मुताबिक लीबिया स्थित भारतीय दूतावास लगातार इन नर्सों के संपर्क में हैं. इनमें से ज़्यादातर नर्सें केरल राज्य से हैं.

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