अजमल क़साब की मौत की सज़ा बरक़रार

उज्जवल निकल इमेज कॉपीरइट BBC World Service

महाराष्ट्र के बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई में 26 नवंबर के हमलों के दोषी पाए गए अजमल क़साब की मौत की सज़ा की पुष्टि कर दी है. इससे पहले निचली अदालत ने क़साब को यह सज़ा सुनाई थी.

इसके बाद क़साब को सर्वच्च न्यायालय में अपनी करने का अधिकार है.

इसके साथ ही हाई कोर्ट ने फ़हीम अंसारी और सबा हुसैन शेख़ को बरी करने के निचली अदालत के फ़ैसले को सही ठहराते हुए उसे बरक़रार रखा है.

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि क़साब और अबू इस्माइल ने जिस बर्बरता से निर्दोष लोगों की जानें लीं वह 'रेयरेस्ट ऑफ़ दी रेयर' की श्रेणी में आता है और उसमें दया की कोई गुंजाइश नहीं है.

फ़ैसला आने के बाद गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा, "जिस तरह से ये मामला अदालत में चला है वह हमारी न्याय प्रणाली को लिए सराहनीय बात है."

जब चिदंबरम से पाकिस्तान में 9/11 से संबंधित मामले के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, "मुझे बताया गया है कि निचली अदालत में जब पिछली बार मामला आया तो वकील ने तारीख़ आगे बढ़ाने के लिए कहा क्योंकि इससे संबंधित मामला हाई कोर्ट में चल रहा है. पाकिस्तान में निचली अदालत और हाई कोर्ट के बीच इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है."

करकरे की हत्या की ज़िम्मेदारी

कोर्ट ने क़साब और अबू इस्माइल को पुलिस अधिकारियों करकरे, सलास्कर और कामटे की हत्याओं की ज़िम्मेदार माना.

Image caption अदालत ने अजमल क़साब को अत्यधिक क्रूरता और बर्बरता का दोषी माना

अदालत ने कहा कि इन हमलों में मासूम बच्चों और महिलाओं की भी जानें गईं और हमलावरों ने अत्यधिक क्रूरता का सुबूत दिया. अदालत का कहना था कि 66 हत्याओं के दोषी क़साब ने न तो अपनी इस हरकत पर अफ़सोस ज़ाहिर किया और न ही पश्चाताप का कोई आभास दिया.

हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष की इस दलील को ठुकरा दिया कि क़साब का इरादा स्वयं अपनी जान लेने का भी था. अदालत ने कहा कि क़साब के पास मिले दस्तावेज़ इस बात की ओर इशारा करते हैं कि यह कांड करने के बाद वह पाकिस्तान भागने का इरादा कर रहा था.

सोची समझी साज़िश

अदालत का कहना था कि जिस प्रकार से ये हत्याएँ हुईं उनसे साफ़ ज़ाहिर है कि यह पहले से सोची समझी साज़िश का नतीजा था.

अदालत ने कहा कि क़साब अपनी मर्ज़ी से और सोच समझ कर लश्करे तैबा में शामिल हुआ और उसने वहाँ प्रशिक्षण हासिल किया.

अदालत ने इन हमलों को भारत सरकार के ख़िलाफ़ हुए हमले माना है.

ग्यारह बजे अदालत की कार्यवाही शुरू होने से पाँच मिनट पहले क़साब को वीडियो लिंक के ज़रिए शामिल किया गया.

फ़ैसला सुनाए जाने से पहले और उसके दौरान वह पूरे समय मुस्कराता देखा गया.

संबंधित समाचार