कश्मीर: सेना में भर्ती के लिए उमड़ी भीड़

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Image caption जनवरी में भी भर्ती शिविर लगा था

भारत प्रशासित कश्मीर में भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए लगे शिविर में कम से कम 10 हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया.

कश्मीर में कुछ महीने पहले तक हालात काफ़ी ख़राब थे और हिंसक प्रदर्शनों में 100 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी. पुलिस के साथ झड़पों में मारे जाने वालों में कई किशोर भी शामिल थे.

भारतीय सेना में भर्ती के लिए ये शिविर इस पूरे घटनाक्रम के चंद महीने बाद लगाया गया है.

इस भर्ती प्रकिया के उप निदेशक कर्नल संजीव सिरोही ने कहा है कि 7500 उम्मीदवारों को योग्य पाया गया था जिनमें से 4500 लोगों ने फ़िटनेस टेस्ट में हिस्सा लिया.

ये लोग कश्मीर घाटी के विभिन्न हिस्सों से आए थे. लोगों का कहना था कि सेना ने उनके गाँवों में आकर भर्ती के बारे में बताया था.

सीमावर्ती हंदवाड़ा ज़िले के एक गाँव से आए बिलाल अहमद मलिक ने कहा, “हमारे गाँव से 54 लड़के भर्ती के लिए आए थे. सिर्फ़ पाँच ही फ़िटनेस टेस्ट के लिए क्वालिवाई कर सके हैं.”

'मैं नहीं डरता'

सेना में भर्ती होने की सूरत पर बिलाल का कहना था, “मैं अपने परिवार की मदद कर सकूँगा जो बेहद ग़रीब है. इसके अलावा देश की सेवा करने का मौका भी मिलेगा.”

वहीं तराल से मोहम्मद मक़बूल बट ने कहा, “कश्मीरी युवाओं की मुख्य समस्या बेरोज़गारी है. मेरे बड़े भाई की शादी हो गई है, बच्चे भी हैं लेकिन उसके पास नौकरी नहीं है. सेना के भर्ती शिविर में आने के कारण गाँव वापस जाकर अगर कुछ नतीजा भुगतना पड़ता है तो मैं इससे डरता नहीं हूँ.”

कर्नल सिरोही के मुताबिक भर्ती के ज़रिए सेना घाटी में बेरोज़गार युवाओं के हालात सुधारना चाहती है.

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों का आना दर्शाता है कि सेना ने कश्मीरियों के दिलों में जगह बना ली है.हालांकि सेना पहले भी ऐसे भर्ती शिविर लगा चुकी है जहाँ बड़ी संख्या में लोग आते रहे हैं.

पर्यवेक्षकों का मानना है कि ये दर्शाता है कि कश्मीरी लोग कश्मकश में हैं...वे अलगाववादियों के जज़्बात समझते हैं लेकिन बढ़ती बेरोज़गारी से त्रस्त आ चुके हैं.अधिकारी पूरा एहतियात बरत रहे हैं कि पिछले साल जैसे हालात फिर न पैदा हों.

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