माओवादियों ने रखी नई शर्त

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Image caption विनील कृष्ण को अभी रिहा नहीं किया गया है

उड़ीसा में मलकानगिरि के ज़िलाधिकारी आर विनील कृष्ण की रिहाई की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है.

अपहृत अधिकारी को छोड़ने के लिए अब माओवादियों ने नई शर्तें रखी हैं. उनकी शर्त है कि जिन पाँच माओवादी नेताओं को सरकार जेल से छोड़ने पर राज़ी हुई है उन्हें ज़िलाधिकारी की रिहाई से पहले माओवादियों को हाथों-हाथ सौंप दिया जाए.

आर विनील कृष्ण और इंजीनियर पवित्र मांझी को माओवादियों ने 16 फ़रवरी को मलकानगिरि के चित्रकोंडा इलाक़े से अग़वा कर लिया था.

तीन दिनों तक चली बातचीत के बाद माओवादियों की 14 माँगों को लेकर समझौता हो गया था और इंजीनियर पवित्र मांझी को बुधवार को रिहा कर दिया गया था. दोनों पक्षों ने कहा था कि अपहृत अधिकारियों को 48 घंटों के अंदर छोड़ दिया जाएगा.

सरकार ने माओवादियों की जो 14 माँगे मान ली हैं उनमें कुछ माओवादी नेताओं की रिहाई भी शामिल है. लेकिन अब शर्त है कि माओवादी नेताओं को पहले जंगल में उनके हवाले किया जाए उसके बाद ही वे ज़िलाधिकारी कृष्ण को छोड़ेंगे.

नई शर्त

ये शर्त माओवादियों ने पवित्र मांझी के हाथों एक पत्र में भिजवाई है. तेलगू में लिखी इस चिट्ठी में ये भी माँग की गई है कि स्वामी अग्निवेश को नए सिरे से बातचीत में शामिल किया जाए.

जिन पाँच माओवादी नेताओं को सौंपे जाने की माँग की गई है उनमें गांती प्रसादम (फ़िलहाल भुवनेश्वर जेल में) और पदमा का नाम शामिल है. पदमा कॉमरेड रामकृष्णा की पत्नी है जो बड़े माओवादी नेता हैं.

इससे पहले बुधवार को प्रसादकम को उड़ीसा हाई कोर्ट ने ज़मानत दे दी. लेकिन बाकी चारों माओवादी नेताओं की ज़मानत की याचिका अभी हाई कोर्ट में दाखिल की जानी है. माना जा रहा है कि इसी बात को लेकर माओवादी नाराज़ हैं.

छठे माओवादी नेता श्रीरमालू श्रीनिवास को मलकानगिरी में एक अदालत ने ज़मानत दे दी थी लेकिन उन्हें अभी जेल से छोड़ा नहीं गया है क्योंकि उनके ख़िलाफ़ एक नया मामला दायर किया गया है. ये बात भी शायद माओवादियों को रास नहीं आई.

बुधवार को माओवादियों की नई शर्तों वाली चिट्ठी मिलने के बाद सरकारी अधिकारी और मध्यस्थ काफ़ी करीब सात घंटे तक बातचीत करते रहे. इस दौरान माओवादी नेता गांती प्रसादम और हैदराबाद से काम करने वाले वी राव से भी फ़ोन पर बात की गई.

रिहाई में अड़चनें

मध्यस्थों ने माओवादियों का अपहरण करने वालों से अपील की है कि वे ज़िलाधिकारी को गुरुवार शाम तक छोड़ दें.

ये अपील ऑडियो के रूप में रिकॉर्ड की गई जिसमें प्रोफ़ेसर जी हरगोपाल ने कहा है कि इस मौके पर नई माँगें रखने से चीज़ें और जटिल होंगी. ये ऑडियो ख़ासतौर पर बीबीसी को उपलब्ध करवाया गया.

माओवादियों के लिए दुनिया से जुड़े रहने के लिए रेडियो ही एकमात्र माध्यम है. ये अपील बीबीसी हिंदी रेडियो पर सुनवाई गई है लेकिन अभी तक अपहरणकर्ताओं की प्रतिक्रिया नहीं आई है.

माओवादियों की नई माँग को देखते हुए लगता है कि ज़िलाधिकारी की रिहाई में और देर लगेगी.

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