मंहगाई के खिलाफ़ मज़दूर सड़कों पर

  • 23 फरवरी 2011

खाद्य पदार्थों की कीमतों में हो रही बेतहाशा बढ़ोतरी, श्रम क़ानूनों के घोर उल्लघंन और बढ़ती बेरोज़गारी के खिलाफ बुलाई गई रैली में देश भर के 18 राज्यों से श्रमिक दिल्ली पहुँचे.

इस रैली को आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक), सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) समेत देश के कई स्वतंत्र मज़दूर और कर्मचारी संगठनों का समर्थन प्राप्त था.

इनकी मांग थी कि गरीबी रेखा के नीचे रहने वालो के लिए शुरु किए गए सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम में मज़दूरों को भी शामिल किया जाए. इस मांग के समर्थन में तर्क दिया गया कि गरीबी रेखा के मानक को काफी नीचे रखा गया है और न्यूनतम मज़दूरी पाने वाले मज़दूर भी उस मानक को पार कर जाते है.

सीटू नेता मोहम्मद यूसुफ तारीगामी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा “सरकार खाने-पीने की ज़रूरी चीज़ों की बढ़ती कीमतों को रोकने में नाकाम रही है. एक तरफ तो लोग भूखे सो रहे हैं और दूसरी ओर सरकारी गोदामों में अनाज सड़ रहा है.”

उत्तर प्रदेश से रैली में हिस्सा लेने पहँचे एक मज़दूर ने बीबीसी को बताया “ रोटी मांगने आए हैं, गांव में कोई काम नहीं है, खाने के लिए खाना नहीं है. मनरेगा के तहत भी काम नहीं मिलता.”

इस रैली में मांग ये भी उठी कि केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का विनिवेश ना किया जाए.

इन सब मांगों को ज्ञापन के रुप में लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को सौंपा जाएगा.

रैली की वजह से कनॉट प्लेस इलाके में ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई और लोगों को काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ा.

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