अमर चित्र कथा के संस्थापक का निधन

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Image caption अनंत पै ने 1967 में अमर चित्र कथा की शुरूआत की थी

लाखों भारतीय बच्चों का भारतीय संस्कृति और महापुरुषों के जीवन से परिचय कराने वाले अनंत पै का निधन हो गया है.

'अनंत पै चाचा' के नाम से मशहूर रहे अमर चित्र कथा के संस्थापक और लेखक का निधन दिल का दौरा पड़ने के कारण हुआ, वे 81 वर्ष के थे.

अमर चित्र कथा की अब तक 10 करोड़ से अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं, आज भी कई भाषाओं में उसका प्रकाशन होता है और प्रति वर्ष उसकी 30 लाख से अधिक प्रतियाँ बिकती हैं.

कर्नाटक में 1929 में जन्मे अनंत पै ने रसायन विज्ञान में मुंबई से उच्च शिक्षा प्राप्त की थी.

अनंत पै ने अपने करियर की शुरुआत टाइम्स ऑफ़ इंडिया समूह से की थी जहाँ वे इंद्रजाल कॉमिक्स के प्रकाशन से जुड़े रहे थे, उसके बाद उन्होंने अमर चित्र कथा के प्रकाशन के इरादे के साथ नौकरी छोड़ दी थी.

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Image caption बच्चों को भारतीय संस्कृति से परिचित कराने में अमर चित्र कथा का बड़ा योगदान रहा है

अमर चित्र कथा का प्रकाशन 1967 में शुरू हुआ था. 'भारत के महापुरुष', 'वीर महिलाएँ', 'प्रख्यात वैज्ञानिक', 'स्वतंत्रता सेनानी' और 'पौराणिक पात्र' जैसी अनेक श्रृंखलाओं के माध्यम से उन्होंने न सिर्फ़ ज्ञान बढ़ाया बल्कि बच्चों को प्रेरित भी किया.

1980 में उन्होंने हिंदी और अँगरेज़ी में बच्चों की एक लोकप्रिय पत्रिका 'टिंकल' का भी प्रकाशन शुरू किया.

उन्होंने 'रामू और श्यामू' और 'कपीश' जैसे लोकप्रिय कॉमिक चरित्रों को जन्म दिया जो वर्षों तक भारतीय पत्र-पत्रिकाओं में छपते रहे.

पिछले दिनों सीढ़ियों से गिर जाने के कारण उनकी कमर की हड्डी टूट गई थी और वे अस्पताल में भर्ती थे.

20 फरवरी 2011 को दिल्ली में आयोजित भारत के पहले 'कॉमिक कन्वेंशन' में अनंत पै को 'लाइफ़ टाइम अचीवमेंट अवार्ड' से नवाज़ा गया था.

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