माओवादियों ने ज़िलाधिकारी को रिहा किया

आर. वी. कृष्णा
Image caption ज़िलाधिकारी को आठ दिन बाद रिहा किया गया है.

उड़ीसा में माओवादियों ने मलकानगिरि के ज़िलाधिकारी आर विनील कृष्ण को रिहा कर दिया है.

उनके साथ ही अगवा किए गए इंजीनियर पबित्र मोहन मांझी को बुधवार को ही रिहा कर दिया गया था.

विनील और पबित्र को माओवादियों ने 16 फ़रवरी को अगवा किया था, जब वे चित्रकोंडा के एक सुदूरवर्ती इलाक़े में एक निर्माण परियोजना का निरीक्षण कर वापस लौट रहे थे.

ज़िलाधिकारी की रिहाई की घोषणा करते हुए उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा, "मलकानगिरि ज़िला प्रशासन ने मुझे सूचित किया है कि ज़िलाधिकारी आर विनील कृष्ण को रिहा कर दिया गया है और वे मलकानगिरि लौट रहे हैं."

पटनायक ने एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार माओवादियों के आगे नहीं झुकी है.

मलकानगिरि से आ रही ख़बरों के अनुसार कृष्णा को गुरुवार शाम चार बजे दुलियम्बा नामक स्थान पर मीडिया के स्थानीय प्रतिनिधियों को सौंपा गया.

मौक़े पर मौजूद एक मीडियाकर्मी ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि विनील कृष्ण को 17-18 माओवादी विद्रोही जंगल से बाहर लेकर आए थे.

मलकानगिरि में ज़िलाधिकारी के आवास के बाहर लोग ख़ुशियाँ मना रहे हैं, पटाके छोड़ रहे हैं.

बीबीसी की भूमिका

उल्लेखनीय है कि उड़ीसा सरकार और मध्यस्थों की तीन दिनों की बातचीत के बाद मंगलवार को माओवादियों ने घोषणा की थी कि ज़िलाधिकारी को 48 घंटों के भीतर रिहा कर दिया जाएगा.

लेकिन बुधवार को माओवादियों ने कई नई माँगें सामने रख दी थीं. उन्होंने विनील कृष्ण की रिहाई से पहले जेल में बंद अपने पाँच सहयोगियों को सौंपे जाने की माँग की.

इसके बाद बातचीत में माओवादियों का पक्ष रखने वाले एक मध्यस्थ प्रोफ़ेसर हरगोपाल ने बीबीसी हिंदी रेडियो के माध्यम से माओवादियों से अपील की थी कि वे अपनी बात से नहीं हटें और गुरुवार शाम छह बजे से पहले ज़िलाधिकारी को रिहा करें.

इसके बाद प्रोफ़ेसर हरगोपाल और एक अन्य मध्यस्थ दंडपाणि मोहंती को माओवादियों से मिलने के लिए हवाई मार्ग से रवाना किया गया. लेकिन उनकी मुलाक़ात माओवादियों से हो पाती, उससे पहले ही विनील कृष्ण को रिहा किया जा चुका था.

दंडपाणि मोहंती ने बीबीसी को फ़ोन कर बताया कि बुधवार को बीबीसी हिंदी रेडियो के ज़रिए की गई अपील का अंतत: असर हुआ.

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