केरल में कोका कोला को झटका

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केरल विधानसभा ने एक नए विधेयक को मंज़ूरी दे दी है जिससे लोग शीतल पेय बनानेवाली कंपनी कोका कोला से मुआवज़े की माँग कर सकेंगे.

कोका कोला के केरल के पलाक्काड ज़िले में स्थित एक कारखाने को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है जिसके बारे में आरोप हैं कि उससे पर्यावरण को गंभीर नुक़सान पहुँचा है और उस क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत हो गई है.

नागरिक अधिकार आंदोलनकारियों ने विधेयक के पारित होने का स्वागत किया है और इसे केरल तथा भारत की जनता के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया है.

मगर कोका कोला की भारतीय सहयोगी – हिन्दुस्तान कोका कोला बीवरेजेज़ प्राइवेट लिमिटेड – ने इन आरोपों को ग़लत बताते हुए नए क़ानून पर निराशा जताई है.

नए क़ानून के तहत तीन सदस्यों वाला एक न्यायाधिकरण गठित किया जाएगा जो कोका कोला के कारखाने से प्रभावित हुए लोगों के मुआवज़े के दावों की सुनवाई करेगा.

विवाद

कोका कोला का पलाक्काड स्थित कारखाना छह से भी अधिक साल पहले बंद कर दिया गया था.

दो साल बाद राज्य सरकार ने कोका कोला के उत्पादन और बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया.

लेकिन बाद में हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद इस पाबंदी को हटा लिया गया.

राज्य सरकार का कहना था कि ये कारखाना उस क्षेत्र में ज़मीन से बहुत अधिक पानी निकाल रहा है जिससे कि वहाँ पीने के पानी की कमी हो गई है.

साथ ही कारखाने से निकले कचरे से वहाँ की फसलें दूषित हुई हैं तथा स्थानीय लोगों को त्वचा, साँस और दूसरी तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.

एक उच्च स्तरीय समिति ने इस कारखाने से हुए नुक़सान की लागत चार करोड़ 70 लाख डॉलर के बराबर बताई है.

कोका कोला ने एक बयान जारी कर कहा है कि नए क़ानून में तथ्यों, वैज्ञानिक आँकड़ों और उन्हें ध्यानार्थ दी गई जानकारियों को जगह नहीं दी गई है.

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