'बजट में आम आदमी के लिए कुछ भी नहीं'

प्रणब मुखर्जी
Image caption प्रणब के बजट से आम आदमी ख़ुश नहीं.

प्रधानमंत्री से लेकर उद्योग जगत तक ज़्यादातर लोग बजट से यो तो ख़ुश हैं या कम से कम संतुष्ट हैं लेकिन बिहार से लेकर जम्मू-कश्मीर तक आम लोगों का यही कहना है कि उनके लिए इस साल के बजट में कुछ नही है.

पटना में ठेला चलाकर किसी तरह अपना पेट पालने वाले रामरुप पंडित ने तो बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए यहां तक कह दिया कि सरकार को सिर्फ़ अमीरों की फ़िक्र रहती है.

बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर जब बजट पर उनकी प्रतिक्रिया लेने पहुंचे तो उन्होंने अपनी नाराज़गी जताते हुए वित्त मंत्री को भी सलाह दे डाली.

Image caption पटना में ठेला चलाकर ज़िंदगी गुज़ारने वाले रामरुप पंडित को बजट से कोई राहत नहीं मिली

'अमीरों का बजट'

उनका कहना था, ''बजट सुनाने वाले मंत्री जी से जा के कहिए कि ऑफिस वाले की मोटी-मोटी तन्ख़्वाह पहले कम करिए. काहे कि यही लोग महंगाई भी बढ़ाते हैं और सरकार से छूट भी ले लेतें है. हम तो ठेला चलाकर जी-जान से खटते हैं फिर भी पेट भरने लायक़ मज़दूरी नहीं पाते हैं. लगता है बजट बनाने वाले जो सरकारी लोग हैं, ऊ सब घूस वाले और चोरी वाले को ही सब सुविधा देने के लिए बजट-फजट बनाते रहते हैं. महंगाई से तो हम ग़रीब मरते हैं, ऊ लोग कहाँ मरते है ?''

उसी तरह रिक्शा चालक भरत महतो का कहना है कि मैं बजट के बारे में क्या जानूं. हां इतना जानता हूं कि इससे ग़रीबों को कोई फ़ायदा नहीं है.

उन्होनें अपनी प्रतिक्रिया कुछ इस तरह दी, ''अनपढ़ ग़रीब हैं, बजट के बारे में का जानें ? इतना कहना है कि रिक्शा चलाते हैं, अकेले कमाते हैं और महंगाई इतना है कि परिवार के लिए नमक-रोटी पर भी आफ़त है. चावल, गेहूं, तेल सब इतना महंगा है कि ग़रीब खाए तो क्या खाए. आप जो सरकार के बजट के बारे में पूछ रहे हैं तो आप ही बताइए कि बजट से हमें का फ़ायदा है? जिसको फ़ायदा है, वो जाने ! एगो पटना में सिर छुपाने केलिए जगह मिलबे नहीं किया आजतक.''

'चौंकाने वाला बजट'

उत्तर प्रदेश के बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी का कहना है कि लखनउ में भी आम लोग बजट से ख़ुश नहीं हैं.

लखनऊ के मानव प्रकाश के अनुसार ये बजट चौंकाने वाला है.

Image caption लखनऊ के मानव प्रकाश को ये बजट चौंकाने वाला लगता है.

उन्होंनें कहा कि, ''इस बार बजट बहुत ही अप्रत्याशित रहा. उन्होंने काफ़ी कुछ टैक्स बढ़ा दिया है, जिसमे होटल, ट्रैवल, लक्ज़री आइटम्स, एयर ट्रैवल्स को काफ़ी महंगा कर दिया है, जो कि हम लोगों को काफ़ी ख़र्चीला पड़ेगा. हम लोग ट्रैवेल प्लान कर रहे थे, आने वाले होलीडे में बच्चों के लिए तो अपने बजट पर पुनर्विचार करना पडेगा.''

लखनऊ के ही कमल कपूर भी कुछ ख़ास ख़ुश नहीं हैं. उन्होंने कहा कि, ''बजट में कोई ख़ास रिलीफ़ तो दिया नही. बीस हज़ार की पर्सनल रिलीफ़ बढ़ा दी है, वह कोई ख़ास तो नही. दो लाख की उम्मीद थी, अभी एक लाख अस्सी हज़ार ही रखा. कांग्रेस के टाइम में महंगाई के अलावा कुछ होता है?''

बीबीसी के जयपुर संवाददाता नारायण बारेठ का कहना है कि राजस्थान में भी लोग बजट से निराश हुए है.

आम अवाम को लगता है कि ये बजट उनके लिए कुछ भी राहत लेकर नहीं आया है.

'कोई फ़ायदा नहीं'

जोधपुर में आसिफ़ ख़ान कहते हैं,''स्टील सस्ता हो तो आम आदमी को क्या मिलेगा. बड़े वर्गों के लिए ये राहत होगा, इसमें ग़रीब के लिए कुछ नहीं है. मोबाइल फ़ोन या फ़्रिज सस्ता होने से ग़रीब की ज़िन्दगी में क्या बदलाव आएगा, उसके लिए तो खान-पान सस्ता होना चाहिए. राशन वैसा ही महंगा है, फिर बजट से क्या फ़ायदा.

जोधपुर के ही भीकाराम को भी बजट पसंद नहीं आया. उनका कहना था ,''बजट में मुझे तो कुछ ख़ास राहत नज़र नहीं आई. हमें तो केरोसिन सस्ता चाहिए. अनाज भी सस्ता हो तो कोई बात बने. हम तो महंगाई से परेशान हैं. रोज़मर्रा की चीज़ों के दाम तो लगातार बढ़ रहे हैं. इस बजट में ऐसा कुछ नहीं है जो हमें राहत दे सके.'

जम्मू से बीबीसी संवाददाता बीनू जोशी के अनुसार वहां भी लोगों की राय कुछ इसी तरह रही.

कॉलेज में पढ़ने वाले शब्बीर वानी का कहना है कि ये बजट आम आदमी के लिए बहुत सख़्त है.

Image caption जम्मु के शब्बीर वानी को भी बजट से कोई ख़ुशी नहीं हुई.

उन्होंने कहा कि, ''इससे खाने पीने की चीज़ें, कपड़े, सोना ... सब महंगा होगा. इलेक्ट्रोनिक चीज़ें सस्ती हुई हैं पर उससे आम आदमी को क्या लाभ होगा. सरकार को चाहिए कि निचले तबक़े के लोगों के लिए खाने पीने और आवश्यक वस्तुओं के दाम कम करे.''

सामाजिक कार्यकर्ता विवेक गुप्ता भी इसे अमीरों का बजट बताते हैं. उनका कहना है कि, ''इस बजट में आम आदमी के लिए कुछ भी नहीं है. इसमें सब कुछ पैसे वालों के लिए ही है. इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान सस्ते हुए हैं लेकिन वोह तो सुख भोग की वस्तुएं हैं. ग़रीब आदमी के लिए आटा, चावल, चीनी, इत्यादि कुछ भी सस्ता नहीं हुआ. पेट्रोल और डीज़ल दोनों महंगे हैं जिससे किराया भाड़ा भी महंगा है. इस सब से आम आदमी की मुसीबतें भी अधिक हैं.''

सरकारी नौकरी करने वाले जसबीर सिंह भी इसे ग़रीबों के ख़िलाफ़ बताते हैं.

उनका कहना था कि, ''आज का बजट तो आम आदमी के लिए नहीं है यह तो व्यापारी और उच्च श्रेणी के लिए है. जिन चीज़ों तक आम आदमी नहीं पहुँच पाता वो सस्ती हुई हैं. खाने पीने की वस्तुएं, पेट्रोल-डीज़ल वग़ैरह आम आदमी की ज़रुरत की चीज़ों को सस्ता करना चाहिए था.''

संबंधित समाचार