प्रसूताओं की मौत: हरकत में आई सरकार

  • 28 फरवरी 2011
गर्भवति महिला
Image caption कथित तौर पर संक्रमित ग्लूकोज़ से 13 प्रसूताओं की मौत हो गई थी.

राजस्थान सरकार ने जोधपुर के सरकारी अस्पताल में 13 प्रसूताओं की मौत की जांच के आदेश दे दिए हैं और प्रभावित परिवारों को पांच-पांच लाख रूपए की मदद का ऐलान किया है.

जोधपुर के एक सरकारी अस्पताल में पिछले दिनों कथित तौर पर संक्रमित ग्लूकोज़ से 13 प्रसूताओं की मौत हो गई थी.

जोधपुर के संभागीय आयुक्त को जांच के आदेश देते हुए सरकार ने दो सरकारी अधिकारियों को लापरवाही के आरोप में निलंबित भी कर दिया है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद रविवार को जोधपुर पहुंचे और सरकारी अस्पताल में इस हादसे का शिकार हुए मरीज़ों और उनके परिजनों से मिले.

गहलोत के आगे, जोधपुर के सरकारी अस्पताल में अपने इकलौते बेटे जीतेन्द्र की मौत का दुःख बयां करती रतन देवी का दामन आंसुओ से भीग गया.

गहलोत ने उनकी वेदना सुनी और उन्हें सांत्वना भी दी, मगर सरकारी सांत्वना प्रभावितों के आंसू नहीं रोक पाई.

रतन देवी की रुलाई फूटी तो उसमें रुदन के कई और स्वर भी शामिल हो गए, क्योंकि जीतेन्द्र दो परिवारों का इकलौता चिराग़ था.

अधूरा रह गया इंतज़ार....

जोधपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक अरविन्द माथुर ने बीबीसी को बताया कि अभी तीन मरीज़ों का इलाज किया जा रहा है, इनमें से दो की हालत गंभीर है.

उन्होंने कहा, ''हम पूरी एहतियात बरत रहे है और चिकत्सीय क्षमता से इलाज किया जा रहा है. उस ग्लूकोज़ के बैच पर पाबंदी लगा दी गई है.’’

अस्पताल में भर्ती प्रेम कँवर के पति प्रकाश ने बीबीसी को बताया कि ग्लूकोज़ चढाने के बाद प्रेम की तबियत ख़राब हो गई. उनका कहना था कि उनका नवजात पुत्र इसी संक्रमित ग्लूकोज के कारण चल बसा.

प्रकाश ने कहा, ''मुझे समझ नहीं आ रहा है कि क्या हुआ, मैं अपनी पत्नी के ठीक होने की दुआ कर रहा हूँ.

नेपाल के मूल निवासी मोहन जोधपुर में चौकिदारी करते हैं. उनकी पत्नी और नवजात पुत्र अस्पताल में ज़िंदगी और मौत से जूझ रहे हैं.

उन्होंने कहा, ''मालूम नहीं क्या हुआ, पर लोग कह रहे है कि संक्रमित ग्लूकोज़ से ही ये बीमारी फैली है, हम नेपाल के है, यहाँ अकेले हैं.

सरकार ने इस मामले में जोधपुर के एक ड्रग इंस्पेक्टर और स्टोर-कीपर को निलंबित कर दिया है.

साथ ही उस ग्लूकोज़ को सप्लाई करने वाली फ़र्म का नाम काली सूची में डाल दिया गया है.

सरकारी अस्पताल में मौत का शिकार हुई इन प्रसूताओं के घरों को मंगल गीतों का इंतज़ार था. मगर अब वहां विलाप के स्वर सुनाई दे रहे हैं.

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