जम्मू-कश्मीर के लिए रोज़गार योजना

Image caption कश्मीरी युवाओं और पुलिस के बीच पिछले साल कई बार झड़पें हुई हैं

रंगराजन समिति ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए महत्वाकांक्षी रोज़गार योजना तैयार कर अपनी अनुशंसाएँ दी हैं.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन की अध्यक्षता में पिछले साल अगस्त में एक विशेष समिति गठित की थी.

इसका मकसद ऐसे सुझाव देना था जिससे राज्य के युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ें और कश्मीरी युवा रोज़गार कमाने लायक हो जाएँ.

सी रंगराजन ने बताया कि समिति ने राज्य के 140,000 युवकों को ट्रेनिंग और नौकरी देने की अनुशंसा की है.

उन्होंने कहा, “समिति की अनुशंसा है कि अगले पाँच सालों में पचास हज़ार से लेकर एक लाख कश्मीरी युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाए.इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो पूरी तरह से पढ़े लिखे नहीं हैं.”

सी रंगराजन ने संकेत दिया कि ट्रेनिंग के बाद युवकों को नौकरी दी जाएगी. इस योजना को लागू करने की ज़िम्मेदारी केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की होगी.

औद्योगिक पहल

आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने बताया है कि ट्रेनिंग प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए कई निजी कंपनियों ने सहयोग की पेशकश की है.

इस समिति की दूसरी अनुशंसा है औद्योगिक पहल. इसके तहत निजी कंपनियाँ अगले पांच साल में जम्मू कश्मीर के 40 हज़ार पढ़े लिखे युवाओं को ट्रेनिंग और नौकरी देंगी.

इसमें इंफ़ोसिस और टाटा कंसलटेंसी जैसी कंपनियों का नाम लिया जा रहा है. समिति के मुताबिक इन युवाओं को जम्मू कश्मीर के बाहर नौकरी दी जाएगी जिससे कश्मीर और भारत के अन्य राज्यों के लोगों को करीब लाने में मदद मिलेगी.

रंगराजन समिति ने कॉलेज और प्रोफ़ेशनल संस्थानों में पढ़ाई के लिए राज्य के विद्यार्थियों को वजीफ़ा देने की अनुशंसा भी की है. हर साल पाँच हज़ार विद्यार्थियों को राज्य से बाहर पढ़ाई के लिए वजीफ़ा मिलेगा.

राज्य के बाहर के कॉलेज जम्मू-कश्मीर के छात्रों के लिए अलग से सीटें नहीं रखेंगे लेकिन सी रंगराजन ने बताया कि विद्यार्थियों को विशेष कोचिंग दी जाएगी ताकि वो दाखिले के काबिल बन सकें.

जम्मू-कश्मीर में हस्तशिल्प और बाग़बानी जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए भी समिति ने अनुशंसा की है.

इन तमाम अनुशंसाओं को सही तरीके से लागू कराने के लिए भी समिति ने विशेष अनुशंसा की है.

पिछले महीने कश्मीर में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों के बाद भारत सरकार ने ये समिति गठित की थी.

कश्मीर यूँ तो एक राजनीतिक समस्या है जहाँ बहुत सारे लोग भारत से अलग होना चाहते हैं. लेकिन भारत में प्रशासन से जुड़े कई लोग मानते हैं कि कश्मीरी युवाओं में आक्रोश का बड़ा कारण बढ़ती बेरोज़गारी है.

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