क्वात्रोकी मामला बंद करने की अर्ज़ी मंज़ूर

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दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई को बोफ़ोर्स मामले में इतालवी व्यवसायी ओत्तावियो क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ मामला बंद करने की अनुमति दे दी है.

सीबीआई ने कहा था कि क्वात्रोकी के भारत प्रत्यर्पण की कोशिशें विफल रही हैं और मामला बंद करने का अनुरोध किया था.

इस पर तीस हज़ारी कोर्ट ने फ़ैसला देते हुए कहा है कि इस मामले की जाँच में पहले ही 250 करोड़ रुपए ख़र्च किए जा चुके हैं.

क्वात्रोकी आज तक भारत की किसी अदालत में पेश नहीं हुए हैं.

भारतीय जनता पार्टी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि ये दर्शाता है कि सरकार ने कैसे सीबीआई का दुरुपयोग किया है.

भाजपा प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद का कहना था, "मामले को आगे बढा़ने के बजाए सीबीआई ने सरकार के दबाव में आकर केस को बंद करने का अनुरोध कर डाला.हम बस ये जानते हैं कि सच्चाई का कभी क्लोज़र नहीं होता."

आयकर अदालत का फ़ैसला

वैसे पिछले महीने ही एक आयकर अदालत ने कहा था कि बोफ़ोर्स तोपों के सौदे में भारतीय व्यापारी विन चड्डा और इतालवी व्यवसायी ओत्तावियो क्वात्रोकी को 41 करोड़ रुपए दिए गए थे और इन आमदनी पर उन्हें कर देना चाहिए.

अपने 98 पन्ने के आदेश में अदालत ने कहा था, "इस बारे में कार्रवाई न करने से एक अनचाही और हानिकारक धारणा बन सकती है कि भारत एक सॉफ़्ट स्टेट (यानी कार्रवाई करने में ढील बरतने वाला) देश है और उसके कर संबंधित क़ानूनों के साथ खिलवाड़ किया जा सकता है."

इस आदेश में ये इस बात का विस्तृत वर्णन है कि बोफ़ोर्स ने 1986 के इस 1437 करोड़ रुपए के सौदे में किसी तरह के दलाल के होने का इनकार किया था.

इस आदेश में ये ज़िक्र भी है कि क्वात्रोकी ने किस तरह सिलसिलेवार तरीके से कई बैंक खाते खोले और इसके सुराग मिटाने प्रयास किए.

अदालत के अनुसार 'बोफ़ोर्स को तोपों की कीमत में से दलाली के 41 करोड़ रुपए को घटा देना चाहिए था क्योंकि सरकार को अधिक पैसे देने पड़े जो इस समझौते के नियमों का उल्लंघन करते हुए चड्डा और क्वात्रोकी को दिए गए.'

क्या है मामला

ये मामला तब का है राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में स्वीडन की बोफ़ोर्स कंपनी से होवित्ज़र तोपें ख़रीदी गईं थीं और आरोप है कि 1437 करोड़ रुपए के इस सौदे के लिए कोई 64 करोड़ रुपए की दलाली दी गई थी.

सीबीआई ने 1999 में पूर्व रक्षा सचिव एसके भटनागर, क्वात्रोकी, विन चड्ढा और बोफोर्स के पूर्व प्रमुख मार्टिन आर्डबो और बोफोर्स कंपनी के ख़िलाफ़ आरोप दायर किया था.

इनमें एसके भटनागर, मार्टिन आर्डबो और विन चड्ढा का निधन हो चुका है. इस मामले के अभियुक्तों में से सिर्फ़ ओतावियो क्वात्रोकी ही जीवित हैं लेकिन उन्हें आज तक भारत की किसी अदालत में पेश नहीं किया जा सका है.

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