द्रमुक का फ़ैसला, कांग्रेस की मुश्किल

करुणानिधि
Image caption द्रमुक के समर्थन वापसी के फैसले ने कांग्रेस को उलझा दिया है.

तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में सीटों के बंटवारे पर यूपीए से द्रमुक के समर्थन वापस लेने के बाद केंद्र सरकार एक बार फिर आकड़ों के गणित में उलझी हुई है.

हालांकि एक तरफ कांग्रेस द्रमुक के साथ गठजोड़ बनाए रखने की कोशिशें भी कर रही है लेकिन कहा जा रहा है कि पार्टी केंद्र में बहुमत के लिए अन्य दलों से भी बात कर सकती है.

रविवार को ही समाजवादी पार्टी ने भी एक प्रेस कांफ्रेंस की लेकिन कांग्रेस को समर्थन के मुद्दे पर उन्होंने कुछ भी स्पष्ट करने से इंकार कर दिया.

इस बारे में पूछे जाने पर सपा नेता मुलायम सिंह यादव का कहना था,'' देखिए गठबंधन के सहयोगी हैं कांग्रेस और द्रमुक. दोनों में अनबन हुई है कल रात. हो सकता है कि आज बात बन जाए. इस बारे में हम क्या कह सकते हैं.''

शनिवार तो द्रमुक ने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में सीटों के बंटवारे पर कांग्रेस से समझौता नहीं होने के बाद केंद्र सरकार से अपने मंत्रियों को वापस बुलाने की घोषणा की थी और कहा था कि वो केंद्र सरकार को मुद्दों पर आधारित समर्थन देंगे.

द्रमुक के नेता टीआर बालू ने यह कह कर बातचीत का विकल्प खुला रखा है कि अगर कांग्रेस बातचीत करना चाहती है और 60 सीटों पर समझौते के लिए तैयार है तो पार्टी केंद्र से मंत्रियों की वापसी के मुद्दे पर पुनर्विचार कर सकती है.

ऐसी ख़बरें हैं कि कांग्रेस अपने कुछ वरिष्ठ नेताओं को द्रमुक नेतृत्व से एक बार फिर बातचीत करने के लिए कहेगी.

दूसरी तरफ राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयास भी लगाए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि कांग्रेस द्रमुक को छोड़ कर जयललिता से भी केंद्र सरकार के लिए समर्थन ले सकती है.

उल्लेखनीय है कि जब द्रमुक नेता और केंद्र में दूरसंचार मंत्री ए राजा पर कार्रवाई की बात आई थी तो जयललिता ने एक टीवी चैनल से साक्षात्कार में कहा था कि अगर द्रमुक यूपीए से समर्थन वापस लेगी तो अन्नाद्रमुक केंद्र को पूरा समर्थन दे सकती है.

इसके अलावा कांग्रेस के पास मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी से समर्थन लेने का विकल्प भी मौजूद है.

द्रमुक और कांग्रेस के बीच सीट समझौते पर भी अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और इस संबंध में फैसला रविवार शाम तक संभव है.

द्रमुक ने समर्थन वापसी की घोषणा कर के कांग्रेस को फिलहाल सांसत में डाल दिया है लेकिन चुनावों से पहले द्रमुक केंद्र में सत्ता पूर्ण रुप से छोड़ दे, यह भी मुश्किल फ़ैसला दिखता है.

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