संसद में 'ग़लती' मानी पीएम ने

  • 7 मार्च 2011
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Image caption प्रधानमंत्री ने संसद में भी कहा कि वो सीवीसी मामले में ग़लती स्वीकार करते हैं.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति के फैसले में उनसे ग़लती हुई और वो इस मामले में पूरी ज़िम्मेदारी लेते हैं.

प्रधानमंत्री ने इस मामले में बयान देते हुए कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का पूरा सम्मान करती है और सीवीसी की नियुक्ति को ख़ारिज किए जाने के बाद नए सीवीसी की नियुक्ति करेगी.

प्रधानमंत्री के बयान के बाद के विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस मामले में ज़िम्मेदारी कबूल करनी चाहिए और उन्होंने इस संबंध में जम्मू में जो बयान दिया था वो बात उन्हें संसद में कहनी चाहिए.

इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इस मामले में अपनी ग़लती मानने से कोई परहेज़ नहीं है.

प्रधानमंत्री का कहना था, ‘‘ मुझे अपनी बात दोहराने में कोई संकोच नहीं है. सीवीसी की नियुक्ति के फ़ैसले में हमसे ग़लती हुई है. मैं इसकी पूरी ज़िम्मेदारी लेता हूं.’’

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति को ख़ारिज़ कर दिया था. इस मामले पर केंद्र सरकार की बहुत किरकिरी हुई थी क्योंकि सरकार ने कोर्ट में नियुक्ति को सही ठहराया था.

सतर्कता आयुक्त पीजे थॉमस की नियुक्ति तीन सदस्यीय पैनल करता है जिसके प्रमुख प्रधानमंत्री होते हैं. इसके अलावा पैनल के सदस्य गृह मंत्री और विपक्ष के नेता होते हैं.

थॉमस की नियुक्ति के फ़ैसले के दौरान सुषमा स्वराज ने आपत्ति जताई थी लेकिन इसके बावजूद सरकार ने थॉमस को ही सीवीसी बनाने का फ़ैसला किया था.

यह मामला कोर्ट में गया और सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में सीवीसी की नियुक्ति को निरस्त कर दिया.

असल में थॉमस जिन दिनों केरल में कार्यरत थे तो उनका नाम पामोलीन घोटाले में भी आया था और इसी कारण भारतीय जनता पार्टी उनके नाम पर राज़ी नहीं थी.

हालांकि अब प्रधानमंत्री ने इस मामले में ज़िम्मेदारी ले ली है और संभवत यह मामला अब शांत हो जाना चाहिए. हालांकि पूरे प्रकरण में प्रधानमंत्री की काफी किरकिरी हुई है.

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