कई समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता गिरफ़्तार

मुलायम सिंह यादव
Image caption समाजवादी पार्टी 'बसपा हटाओ प्रदेश बचाओ' आंदोलन चला रही है.

उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने सोमवार सात मार्च से मायावती सरकार के ख़िलाफ़ तीन दिन के लिए ‘बसपा हटाओ प्रदेश बचाओ’ आंदोलन शुरू किया है.

पुलिस के अनुसार आंदोलन के पहले दिन समाजवादी पार्टी के लगभग ढाई हजार कार्यकर्ता शांति भंग की आशंका में गिरफ्तार किये गए, जबकि समाजवादी पार्टी का दावा है कि एक लाख से ज्यादा लोगों ने गिरफ्तारी दी और कई जगह सरकारी कामकाज ठप कर दिया गया.

मायावती सरकार ने समाजवादी पार्टी के आंदोलन को विफल करने के लिए पूरे प्रदेश में धारा 144 को सख्ती से लागू किया.

सैकड़ों लोगों को रात में ही गिरफ्तार कर लिया गया था. समाजवादी पार्टी कार्यालय और पार्टी नेता मुलायम सिंह यादव के घर के चारों ओर पुलिस की ज़बर्दस्त घेराबंदी कर दी गयी थी.

पुलिस की कार्रवाई

लेकिन समाजवादी पार्टी के कुछ कार्यकर्ता सुबह करीब सात बजे ही पुलिस को चकमा देते हुए सचिवालय अनेक्सी स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय पहुँच गए और तीनों दरवाजों पर ताला डाल दिया.

प्रशासन ने आनन फानन ताले तोड़ दिए और कार्यालय समय पर खुल गए. बाद में पुलिस ने ताला डालने की घटना को भी नकार दिया.

इसी बीच मुलायम सिंह यादव में लोक सभा अध्यक्ष मीरा कुमार को फ़ोन कर शिकायत की कि उन्हें और उनके सांसद बेटे अखिलेश यादव को प्रशासन ने घर पर नज़रबन्द कर दिया है.

सपा के अनुसार लोक सभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप पर पुलिस ने उन्हें दिल्ली जाने दिया. समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे पर लोक सभा में हंगामा किया और मायावती सरकार बर्खास्त करने की मांग की.

इधर पूरे प्रदेश में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जगह जगह जुलूस निकालकर सरकार के ख़िलाफ़ नारे लगाए. लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. राजधानी लखनऊ समेत एक दो जगह लाठीचार्ज की भी खबरें हैं.

पुलिस के अनुसार प्रदेश भर में गिरफ़्तार लोगों में छह सांसद और 18 विधायक शामिल हैं. विधान सभा में विपक्ष के नेता शिव पाल सिंह यादव ने लखनऊ में हनुमान सेतु पर गिरफ्तारी दी, जहां मुख्यमंट्री मायावती का पुतला भी फूँका गया.

विशेष पुलिस महानिदेशक ब्रजलाल ने पत्रकारों को बताया कि आंदोलन के चलते कहीं भी सरकारी कामकाज या जनजीवन प्रभावित नही होने दिया गया.

समाजवादी पार्टी का दावा

उधर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने दावा किया कि एक लाख से अधिक लोगों ने गिरफ्तारी दी और कई जिलों में कलेक्ट्रेट का कामकाज ठप रहा.

चौधरी ने एक लिखित बयान में दावा किया कि , "उत्तर प्रदेश की बलात्कारी , अत्याचारी, किसान विरोधी , तानाशाही तथा भ्रष्ट सरकार के खिलाफ पहले ही दिन प्रबल जनरोष दिखायी पड़ा.’’

राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि, "समाजवादी पार्टी के अहिंसक आंदोलन के प्रति बर्बर दमन चक्र चलाकर मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र की सारी मर्यादाएं तोड़ दी हैं. पर सरकार दमन चक्र से समाजवादी पार्टी को डरा नही सकती. आने वाले दो दिनों में आंदोलन और तेज होगा.’’

उधर बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने समाजवादी पार्टी के आंदोलन को फ़्लॉप बताया है.

एक लिखित बयान में श्री मौर्या ने कहा, "राज्य की जनता पूर्व सपा सरकार के कार्यकाल को अभी नही भूली है, जब गुंडे , माफिया और शातिर अपराधी सरकारी संरक्षण में खुले आम न केवल क़ानून का मजाक उड़ाते थे, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं का मजाक उड़ान एम भी संकोच नही करते थे.’’

प्रेक्षकों का कहना है कि समाजवादी पार्टी सड़कों पर जोरदार संघर्ष करके ये साबित करना चाहती है कि अगले चुनाव में सपा ही बहुजान समाज पार्टी का मुकाबला कर सकती है.

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