तेलंगाना मुद्दे पर आंध्र में नया मोड़

  • 7 मार्च 2011
तेलंगाना के तेलगु देसम पार्टी विधायक नागम जनार्धन रेड्डी इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption रेड्डी को तेलंगाना समर्थकों का भारी समर्थन मिल रहा है

आंध्र प्रदेश में पृथक तेलंगाना राज्य की मांग से उठने वाला राजनैतिक संकट बराबर गहराता जा रहा है और उस से लगभग हर राजनैतिक दल में फूट पड़ती नज़र आ रही है.

इस का ताज़ा उदाहरण मुख्य विपक्षी दल तेलुगु देसम में देखने को मिला है जहाँ विधान सभा में तेलंगाना क्षेत्र के विधायक सदन में ही आपस में लड़ पड़े.

पार्टी के वरिष्ठ तेलंगाना नेता नागम जनार्धन रेड्डी ने जहाँ सदन में "जय तेलंगाना" के नारे लगाकर कार्यवाही में रुकावट खड़ी कर दी वहीं उन्हीं की पार्टी के दूसरे विधायकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की.

इन दूसरे विधायकों नारासिन्हा, दयाकर राव और वेंकट वीर्या ने जनार्धन रेड्डी को ख़ामोश करके बिठाने की कोशिश की लेकिन वो बराबर नारे लगाते रहे और उस के कारण सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित करनी पड़ी.

यह लड़ाई सदन के बाहर भी चली जब नारासिम्ह ने आरोप लगाया की जनार्धन रेड्डी अपने स्वार्थ के लिए तेलंगाना का मुद्दा उठा रहे हैं.

लेकिन जनार्धन रेड्डी ने कहा की जहाँ कांग्रेस के तेलंगाना विधायक, टीआरएस, भाजपा और कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य विधान सभा सत्र का बहिष्कार कर रहे हैं और तेलंगाना राज्य की मांग कर रहे हैं वहीं तेलुगु देसम के तेलंगाना विधायक आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों के विधायकों के साथ अन्दर बैठे हैं जिस से तेलंगाना की जनता को ग़लत संकेत मिल रहे हैं.

उन्होंने कहा कि जब तक केंद्र सरकार तेलंगाना राज्य के विषय पर स्पष्ट घोषणा नहीं करती, वो सदन में आवाज़ उठाते रहेंगे.

इस घटना के बाद जनार्धन रेड्डी पृथक तेलंगाना राज्य के समर्थकों की नज़र में एक हीरो बन गए हैं जबकि दूसरे तेलुगु देसम पार्टी (तेदपा) विधायकों को विरोध का सामना करना पड रहा है.

तेलंगाना के वकीलों और छात्रों ने जनार्धन रेड्डी की प्रशंसा की है.

तेलंगाना के कई ज़िलों में प्रदर्शनकारियों ने उन तेदपा विधायकों के पुतले जलाए हैं जिन्होंने जनार्धन रेड्डी का विरोध क्या था.

दूसरे तेदपा विधायकों पर दबाव बढ़ रहा है कि वो भी चंद्रबाबू नायडू का साथ छोड़ कर जनार्धन रेड्डी का साथ दें.

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Image caption रेड्डी ने खुलकर तेलंगाना राज्य की मांग का समर्थन किया है.

जनार्धन रेड्डी का कहना है कि अगर चंद्रबाबू नायडू उनके विरुद्ध करवाई करते हैं तब भी वो तेलंगाना की मांग जारी रखेंगे.

इससे तेलुगु देसम में एक चिंता की लहर दौड़ गई है. नायडू चाहते हैं की तेलंगाना के नेता ख़ामोश रहें लेकिन अब उनकी पकड़ ढीली पड़ती नज़र आ रही है.

पार्टी की इस हालत पर विचार के लिए नायडू ने एक बैठक भी बुलाई लेकिन उसमें तेलंगाना क्षेत्र के केवल 14 विधायकों ने ही भाग लिया.

जनार्धन रेड्डी इस बैठक में शामिल नहीं हुए जिससे यह स्पस्ट हो गया है कि उनकी पार्टी से दूरी बढती जा रही है.

मिलयन मार्च

इधर तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति ने घोषणा की है हैदराबाद में तेलंगन समर्थकों का मिलयन मार्च पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 मार्च को ही आयोजित होगा और उस में लाखों लोग भाग लेंगे.

समिति पर ये दबाव था की वो जूनियर कॉलेज की परीक्षाओं के मद्देनज़र इस प्रोग्राम को टाल दे लेकिन समिति के संयोजक प्रोफ़ेसर कोदंडा राम ने इस मांग को रद्द कर दिया.

उन्होंने कहा कि छात्रों को कष्ट से बचाने के लिए इस प्रोग्राम का समय बदला जा रहा है और अब सुबह की बजाय यह कार्यक्रम एक बजे से चार बजे तक होगा.

इसमें तेलंगाना ज़िलों से आने वाले लाखों लोग हुसैन सागर झील के किनारे जमा होंगे और धरना देंगे.

प्रोफ़ेसर कोदंडा राम ने कहा कि अब तक भी केंद्र सरकार ने तेलंगाना की जनता की जायज़ मांग पर ध्यान नहीं दिया है इसलिए ज़रूरत पड़ने पर वो मिस्र के तहरीर चौराहे जैसी स्थिति पैदा कर देंगे.

हालाँकि पुलिस ने इस कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी है और हुसैन सागर झील के आसपास लोगों के जमा होने पर प्रतिबंध है लेकिन आयोजकों ने कहा कि वह लोग हर क़ीमत पर जमा होंगे.

प्रोफ़ेसर कोदंडा राम ने कहा कि इसका उद्देश्य यही है कि सारे तेलंगाना के लोग इकट्ठा होकर केंद्र सरकार से एक आवाज़ में मांग करें कि हमें हमारा तेलंगाना राज्य दे दो और इसके लिए जल्द संसद में एक बिल लाओ.

पुलिस ने इस कार्यक्रम को रोकने के लिए करवाई शुरू कर दी है और उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों की समिति के एक नेता रवि सहित कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

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