अदालत की बजाय हसन अली पहुँचे अस्पताल

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Image caption काले धन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नाराज़गी जताई है

काले धन को कथित तौर पर विदेशी बैंकों में जमा करने के आरोप को झेल रहे व्यापारी हसन अली खान को बुधवार तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया गया है. इससे पहले हसन अली ख़ान को मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.

सोमवार देर रात प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें गिरफ़्तार किया था और उन्हें मंगलवार को अदालत में पेश किया जाना था. लेकिन ऐन वक्त पर उन्होंने उच्च रक्तचाप और दूसरी परेशानियों की होने की शिकायत की जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.

बताया जाता है कि हसन अली डायबिटीज़ और लीवर सिरोसिस के रोगी हैं.गिरफ़्तार किए जाने के बाद उन्हें आज़ाद मैदान पुलिस थाने ले जाया गया था.

हसन अली का कहना रहा है कि वो निर्दोश हैं और उन्हें राजनीतिक साज़िश के तहत निशाना बना जा रहा है.

भारतीय मीडिया में उनकी करोड़ों की संपत्ति और विदेशों में खातों के बारे में कई तरह की खबरें सामने आ रही हैं.

पुणे के निवासी हसन अली के बारे में मीडिया रिपोर्टें आती रही हैं कि उनके स्विस खातों में कथित तौर पर करोड़ो रुपए जमा हैं. सालों से आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय उनके खातों और कथित काले धन की जाँच करता रहा है.

रविवार और सोमवार को पड़े छापों से पहले भी वर्ष 2007 में उनके घरों पर छापे डाले गए थे.

कोर्ट की नाराज़गी

ऐसी अटकलें लगती रही हैं कि उनके पास जो काला धन है वो कई राजनीतिज्ञों और उद्योगपतियों का है और हसन अली खान धन को विदेशी बैंको में रखने का मात्र एक साधन हैं और इसके लिए उन्हें कमीशन मिलता था.

सरकार पर आरोप लगते रहे हैं कि उसकी एजेंसियाँ हसन अली के मामले को लेकर गंभीर नहीं हैं. यहाँ तक कि उच्चतम न्यायालय ने भी कुछ दिन पहले की गई टिप्पणी में सरकार से जैसे झुंझलाते हुए पूछा था कि आखिर देश में ये हो क्या रहा है.

रिपोर्टों के मुताबिक हसन अली का पहले कहना था कि उनका रद्दी का व्यापार था और उनकी वार्षिक आय तीस लाख है.

उधर उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार को काले धन मामले में फ़टकार लगाते हुए कहा कि हसन अली खान जिन पर हेराफ़ेरी, आयकर की चोरी, और हथियारों की कालाबाज़ारी और आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों से संपर्क रखने के आरोप लगते रहे हैं, उन पर कड़े आतंकवाद विरोधी कानून जैसे पोटा का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है. अदालत ने पूछा कि हसन अली पर कड़े कानून जैसे फ़ेमा का इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा है?

अदालत ने पूछा कि अली के खिलाफ़ मामलों की जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई को क्यों न दे दी जाए?

सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमणियम ने अदालत को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय हसन अली की हिरासत की मांग करेगी और प्रवर्तन निदेशालय अरुण माथुर खुद जाँच की देखरेख कर रहे हैं.

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