'पाकिस्तान में शिक्षा का हाल बेहाल'

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption पाक में करीब 70 लाख बच्चे प्राथमिक शिक्षा से वंचित हैं.

शिक्षा को लेकर काम करने वाली एक संस्था के मुताबिक पाकिस्तान में शिक्षा की स्थिति गंभीर है और इस संकट से देश की संप्रभुता को ख़तरा है.

ब्रिटेन की सरकार के सहयोग से पाकिस्तान में शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही संस्था ‘पाकिस्तान एजुकेशन टॉस्क फोर्स’ ने वर्ष 2011 को पाकिस्तान में ‘तालीमी इमरजेंसी’ का साल क़रार दिया है.

संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षा के इस आपातकालीन दौर का पाकिस्तान पर सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पड़ेगा.

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई भूमिका निभाने में नाकाम रहा है और करीब 70 लाख बच्चे प्राथमिक शिक्षा से वंचित हैं. यह संख्या लाहौर शहर की पूरी जनसंख्या के बराबर है.

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में जितने बच्चे इस समय प्राथमिक शिक्षा से वंचित हैं उनकी करीब 10 प्रतिशत संख्या पाकिस्तान में है.

ज़िम्मेदारी पूरा करने में पीछे

इस तरह शिक्षा से वंचित बच्चों की संख्या के हवाले से पाकिस्तान दुनिया में दूसरे स्थान पर है.

टॉस्क फोर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि हाई स्कूलों में केवल 23 प्रतिशत बच्चों के प्रवेश के कारण पाकिस्तान अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारियों को पूरा करने में भी पीछे है.

रिपोर्ट के मुताबिक आज भी ऐसे बच्चों की संख्या करीब ढाई करोड़ है जो शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं.

इस रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में शिक्षा के अवसर कम नहीं हैं बल्कि उसका आवंटन एक बड़ी समस्या है.

देश के 20 प्रतिशत संपन्न नागरिक ग़रीबों की तुलना में सात साल अधिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. 30 प्रतिशत पाकिस्तानी मुश्किल से दो साल तक स्कूल जा पाते हैं.

एजुकेशन टॉस्क फोर्स का कहना है कि पाकिस्तान की तुलना में दुनिया में अन्य ग़रीब देशों में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चों की संख्या कहीं ज़्यादा है.

साथ ही भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देश अपने-अपने लक्ष्य निर्धारित समय में पूरा कर रहे हैं.

शिक्षा का नया तंत्र

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी अपने सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम चार प्रतिशत शिक्षा पर ख़र्च करने को प्रतिबद्ध है, लेकिन कुछ सालों के बजट में यह प्रतिशत बढ़ने के बजाए कम हो रहा है. यानी पिछले साल बजट का केवल दो प्रतिशत मद शिक्षा पर ख़र्च किया गया.

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान को शिक्षा में अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए वार्षिक स्तर पर 100 अरब रुपए चाहिए.

टॉस्क फोर्स का कहना है कि पाकिस्तान में सरकारी स्कूलों पर सकल घरेलू उत्पाद का केवल डेढ़ प्रतिशत हिस्सा ख़र्च हो रहा है. यह ख़र्च उस आर्थिक साहयता से कहीं कम है जो दूसरी सरकारी संस्थाओं को दिया जाता है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि 30 हज़ार से अधिक स्कूलों की इमारतों की स्थिति काफ़ी ख़राब है जबकि 21 हज़ार से अधिक स्कूल खुले आसमान के नीचे चल रहे हैं. बहुत से स्कूलों में बुनियादी सुविधाएँ मौजूद नहीं हैं.

एजुकेशन टॉस्क फोर्स कहती है कि शिक्षा की इस गंभीर और निराशाजनक स्थिति से निपटने के लिए ज़रूरी है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के स्तर से लेकर स्कूल के अध्यापकों तक सब को मिल कर शिक्षा का ऐसा तंत्र बनाना चाहिए जिससे नई पीढ़ी को फायदा हो.

इस रिपोर्ट में दिए गए प्रस्ताव के मुताबिक पाकिस्तान को शिक्षा में अपने लक्ष्य प्राप्त करने के लिए साल 2011-12 के बजट में शिक्षा के लिए ज़्यादा धन खर्च करने की ज़रूरत है.

संबंधित समाचार