सीपीएम ने दी नए चेहरों को जगह

पश्चिम बंगाल चुनावी रैली
Image caption पश्चिम बंगाल में आगामी अप्रैल और मई में छह चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे.

पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने आधे से ज़्यादा विधानसभा सीटों पर नए चेहरों को मैदान में उतारने का फैसला किया है.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की अगुवाई में वाम गठबंधन ने 294 चुनावी विधानसभा सीटों में से 149 पर नए चेहरों को उतारने का फैसला किया है.

पश्चिम बंगाल में आगामी अप्रैल और मई में छह चरणों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने नौ मंत्रियों का नाम अपनी सूची से हटा दिया है. साथ ही लगभग उन सभी विधायकों को सूची से बाहर रखा गया है जिन पर भ्रष्टाचार और हिंसा में लिप्त होने के आरोप हैं.

बुद्धदेब की प्राथमिकताएं

पार्टी के चुनावी उम्मीदवारों की सूची में मुसलमानों को 40 फ़ीसदी सीटें दी गई हैं. विश्लेषकों का कहना है कि ये मुसलमान वर्ग में कमज़ोर होते मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रभाव को सुधारने का एक प्रयास है.

माओवाद से ग्रस्त जंगलमहल क्षेत्र में सुशांत घोष को टिकट दिया गया है, जो एक मंत्री हैं. लेकिन इस क्षेत्र में ज़्यादातर उम्मीदवार राजनीति में नए हैं.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सूत्रों ने बताया है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य ने पार्टी नेताओं को कहा है कि वे पार्टी में ‘भ्रष्ट चेहरे’ नहीं देखना चाहते.

पार्टी के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा, “शायद ये सूची बुद्धदेब भट्टाचार्य की प्राथमिकताओं का एक प्रतिबिंब है. वे पार्टी के कप्तान हैं और उनकी टीम उन्ही की पसंद की है.”

पश्चिम बंगाल की विधानसभा में सबसे लंबे समय तक स्पीकर रह चुके हाशिम अब्दुल हलीम ने स्वास्थ्य ख़राब होने के कारण चुनावी राजनीति छोड़ने का फैसला किया है.

हाशिम अब्दुल हलीम के बेटे फुआद हलीम, जो पेशे से एक डॉक्टर हैं, बालीगंज से चुनाव लड़ेंगें.

विधानसभा में उपाध्यक्ष भक्तिपदा घोष और वाम मोर्चा के अध्यक्ष मोहम्मद मसीहा को चुनावी टिकट नहीं दिया गया है.

साथ ही रबिन देब और मोहम्मद सलीम जैसे कुछ वरिष्ठ नेताओं को भी टिकट देने से इंकार कर दिया गया है, लेकिन उन्हें पार्टी ऑफिस में कुछ बड़ी ज़िम्मेदारियां दी गई हैं.

उधर पड़ोसी राज्य असम में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने करीब 54 विधायकों को उनके पद पर बनाए रखा है.

कांग्रेस ने 19 महिला उम्मीदवार, 20 युवा नेता और 23 मुसलमान उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है.

बंगाल और असम में मुसलमानों की तादाद सबसे ज़्यादा है.

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