सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं: आडवाणी

  • 17 मार्च 2011
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Image caption संसद में भाजपा के तीन सांसदों ने रुपयों भरा बैग पेश करके सनसनी पैदा कर दी थी

संसद में विकीलीक्स के दस्तावेज़ों को लेकर भारी हंगामा हुआ और भाजपा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस्तीफ़े की माँग की. हंगामे के कारण संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी.

लोक सभा में ये मामला उठाते हुए विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि विकीलीक्स के दस्तावेज़ों से ये बात साफ़ हो गई है कि वर्ष 2008 में मनमोहन सरकार को विश्वास प्रस्ताव के दौरान गिरने से बचाने के लिए पैसों का लेन देन हुआ था.

सुषमा स्वराज ने कहा कि सरकार शासन करने का नैतिक अधिकार खो चुकी है.

उनका कहना था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक क्षण भी अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं हैं. सुषमा स्वराज ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफ़े की मांग की.

'सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार नहीं'

विकीलीक्स के दस्तावेज़ों को लेकर संसद की भीतर हुए हंगामे के बाद संसद के बाहर भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सरकार और प्रधानमंत्री पर तीखा प्रहार किया है.

लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, "हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री सदन में आएं और घोषणा करें कि नए रहस्योद्घाटन के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया है."

लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि इस प्रकार के पर्दाफ़ाश के बाद वर्तमान सरकार को एक पल के लिए भी सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं हैं.

आडवाणी ने कहा कि विकीलीक्स के ज़रिए सामने आई जानकारी के बाद भारत का लोकतंत्र बदनाम हुआ है.

उन्होंने कहा, "ये पहली बार है कि जब लगता है कि पूरा का पूरा शासनतंत्र, पार्टी तंत्र शामिल है...ये कुछ ऐसे था कि जहां-जहां पर भी जिस-जिस को भो तुम ख़रीद सकते हो ख़रीदो."

लोक सभा में समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह का कहना था कि उनकी पार्टी ने सरकार को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और वो नहीं चाहते कि सरकार बचाने वाले सभी लोग बदनाम हो जाएँ इसलिए सभी काम रोक कर इस विषय पर चर्चा कराई जानी चाहिए.

राज्यसभा में भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा कि सरकार ने ये 'राजनीतिक और नैतिक पाप' किया है. कांग्रेस सदस्यों ने उनके शब्दों पर आपत्ति की.

अरुण जेटली ने भी सरकार के इस्तीफ़े की माँग की, इस दौरान भाजपा सांसद 'शर्म करो, शर्म करो' के नारे लगाते रहे थे.

सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि वोट के लिए पैसे देने के मामले की आपराधिक जाँच की जानी चाहिए.

शिव सेना नेता मनोहर जोशी ने कहा कि कांग्रेस संस्कृति में ये नया नहीं है. उन्होंने भी सरकार के इस्तीफ़े की माँग की है.

इसके जवाब में कहा कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सवाल उठाया कि अख़बार में छपे दस्तावेज़ किसी भी अदालत में स्वीकार्य नहीं है तो इस पर कार्रवाई कैसे की जा सकती है.

उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्यों को यदि इस पर आपत्ति है तो वो इसे अदालत में चुनौती दे सकते हैं.

विकीलीक्स दस्तावेज़

उल्लेखनीय है कि विकीलीक्स के दस्तावेज़ों में भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर वर्ष 2008 में मनमोहन सरकार को विश्वास प्रस्ताव के दौरान गिरने से बचाने के लिए पैसों का लेन देन का ज़िक्र है.

ये बात विकीलीक्स में अमरीकी कूटनयिकों के हवाले से अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' ने प्रकाशित की हैं.

विकीलीक्स के अनुसार एक दस्तावेज़ के अनुसार अमरीकी दूतावास के एक अधिकारी को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सतीश शर्मा के एक सहायक ने रुपयों भरी दो तिजोरियाँ दिखाईं थीं और कहा था कि इनमें 50 से 60 करोड़ रुपए हैं जिनका इस्तेमाल घूस देने के लिए किया जाना था.

हिंदू के अनुसार नवंबर, 2008 में सतीश शर्मा के इस सहायक को अमरीकी विदेश मंत्रालय के आई-वोट कार्यक्रम के तहत अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव को देखने पर्यवेक्षक के बतौर भेजा गया था.

हालांकि सतीश शर्मा ने ऐसे किसी भी सहायक से इनकार किया है.

सतीश शर्मा ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा है कि उनका कोई ऐसा सहायक न पहले था और न अब है.

दस्तावेज़ों के अनुसार सरकार बचाने के लिए सरकार के पक्ष में वोट डालने के लिए राष्ट्रीय लोक दल के नेता अजित सिंह के चार सांसदों को रिश्वत देकर मनाना पड़ा था.

आरोपों से इनकार

हालांकि अजित सिंह ने मीडिया से बातचीत में इन आरोपों से साफ़ इनकार किया है.

उनका कहना था कि विभिन्न दलों से सलाह मशविरे के बाद उनकी पार्टी ने अपना रुख़ पहले ही स्पष्ट कर दिया था.

उल्लेखनीय है कि उस दौरान भारतीय जनता पार्टी के तीन सांसद लोकसभा में रुपयों से भरा एक बैग लेकर सदन में आए और उन्होंने आरोप लगाया था कि ये रुपए उन्हें यूपीए सरकार के विश्वासमत के दौरान अनुपस्थित रहने के लिए दिए गए थे.

इस पर संसद में भारी हंगामा हुआ था और उस दौरान कांग्रेस ने कहा था कि ये सरकार को बदनाम करने के लिए रची गई साज़िश का हिस्सा है.

पिछले कई दिनों से हिंदू अख़बार विकीलीक्स के दस्तावेज़ प्रकाशित कर रहा है.

बुधवार को कांग्रेस के प्रवक्त अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि अगर राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियां या फिर पूरा देश विकीलीक्स जैसे तत्वों की ओर से जारी की जाने वाली सनसनीखेज सामग्री पर प्रतिक्रिया देने लग जाए तो इससे देश के लोकतंत्र और इसकी स्थिरता की गरिमा कम होगी.

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