विकीलीक्स: विश्वास मत में पैसों के लेन-देन का ज़िक्र

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Image caption संसद में भाजपा के तीन सांसदों ने रुपयों भरा बैग पेश करके सनसनी पैदा कर दी थी

विकीलीक्स के दस्तावेज़ों में भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर वर्ष 2008 में मनमोहन सरकार को विश्वास प्रस्ताव के दौरान गिरने से बचाने के लिए पैसों का लेन देन का ज़िक्र है.

ये बात विकीलीक्स में अमरीकी कूटनयिकों के हवाले से अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' ने प्रकाशित की हैं.

विकीलीक्स के दस्तावेज़ों में अमरीकी अधिकारियों ने सतीश शर्मा को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और सोनिया गांधी का क़रीबी बताया है.

विकीलीक्स के अनुसार एक दस्तावेज़ के अनुसार अमरीकी दूतावास के एक अधिकारी को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सतीश शर्मा के एक सहायक ने रुपयों भरी दो तिजोरियाँ दिखाईं थीं और कहा था कि इनमें 50 से 60 करोड़ रुपए हैं जिनका इस्तेमाल घूस देने के लिए किया जाना था.

हिंदू के अनुसार नवंबर, 2008 में सतीश शर्मा के इस सहायक को अमरीकी विदेश मंत्रालय के आई-वोट कार्यक्रम के तहत अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव को देखने पर्यवेक्षक के बतौर भेजा गया था.

हालांकि सतीश शर्मा ने ऐसे किसी भी सहायक से इनकार किया है.

दस्तावेज़ों के अनुसार सरकार बचाने के लिए सरकार के पक्ष में वोट डालने के लिए राष्ट्रीय लोक दल के नेता अजित सिंह के चार सांसदों को रिश्वत देकर मनाना पड़ा था.

हालांकि अजित सिंह ने मीडिया से बातचीत में इन आरोपों से साफ़ इनकार किया है.

उनका कहना था कि विभिन्न दलों से सलाह मशविरे के बाद उनकी पार्टी ने अपना रुख़ पहले ही स्पष्ट कर दिया था.

उल्लेखनीय है कि उस दौरान भारतीय जनता पार्टी के तीन सांसद लोकसभा में रुपयों से भरा एक बैग लेकर सदन में आए थे और उन्होंने आरोप लगाया था कि ये रुपए उन्हें यूपीए सरकार के विश्वासमत के दौरान अनुपस्थित रहने के लिए दिए गए थे.

इस पर संसद में भारी हंगामा हुआ था और उस दौरान कांग्रेस ने कहा था कि ये सरकार को बदनाम करने के लिए रची गई साज़िश का हिस्सा है.

पिछले कई दिनों से हिंदू अख़बार विकीलीक्स के दस्तावेज़ प्रकाशित कर रहा है.

बुधवार को कांग्रेस के प्रवक्त अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि अगर राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियां या फिर पूरा देश विकीलीक्स जैसे तत्वों की ओर से जारी की जाने वाली सनसनीखेज सामग्री पर प्रतिक्रिया देने लग जाए तो इससे देश के लोकतंत्र और इसकी स्थिरता की गरिमा कम होगी.

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