मैं किसी सौदेबाज़ी का हिस्सा नहीं: मनमोहन सिंह

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Image caption प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इंडिया टुडे के सम्मेलन में इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी

भारत के प्रधामंत्री मनमोहन सिंह ने विकीलीक्स पर हाल में सार्वजनिक हुई वर्ष 2008 के विश्वास प्रस्ताव से संबंधित जानकारी पर कहा है कि वे 'ऐसी किसी भी सौदेबाज़ी का हिस्सा नहीं हैं.'

विकीलीक्स पर सार्वजनिक की गई जानकारी एक अमरीकी राजनयिक के अपनी सरकार को भेजे संदेश पर आधारित है.

इस संदेश में कहा गया है कि अमरीकी दूतावास के एक राजनीतिक सलाहकार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सतीश शर्मा के एक सहायक ने रुपयों भरी दो तिजोरियाँ दिखाईं थीं और कहा था कि (विश्वास मत के दौरान) समर्थन जुटाने के लिए 50 से 60 करोड़ रुपए हैं.

इसके बाद गुरुवार को संसद में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ था और विपक्षी दलों, विशेष तौर पर भाजपा ने प्रधानमंत्री के इस्तीफ़े की मांग की थी.

दिल्ली में मीडिया ग्रुप इंडिया टु़डे के सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने एक सवाल के जवाब में अपनी चुप्पी तोड़ी.

हाल में जापान में भूकंप के बाद परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा के बारे में पैदा हुई शंकाओं के संदर्भ में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्होंने भारत के सभी परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा के पुनर्निरीक्षण का आदेश दिया है.

'संसद में बात रखूँगा'

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "मुझे ऐसी ख़रीद की कोई जानकारी नहीं है और मैं ज़ोर देकर स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैने किसी को सांसदों का वोट ख़रीदने की अनुमति नहीं दी है. सांसदों के वोट ख़रीदे जाने की किसी घटना की मुझे जानकारी नहीं है. मैं पूर्ण विश्वास से कह सकता हूँ मैं ऐसी किसी सौदेबाज़ी का हिस्सा नहीं हूँ."

मनमोहन सिंह ने कहा, "मुझे लगता है कि जो लोग इससे (विकीलीक्स) प्रभावित हैं, उन्होंने इस मामले पर जो कहना था, वे कह चुके हैं... उन्होंने कूटनयिक संदेशों के भरोसेमंद होने पर सवाल उठाया है."

विकीलीक्स के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों की जो घटनाएँ हैं, उनके बारे में वे टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे क्योंकि इन मामलों पर संसद में बहस हो रही है. उन्होंने कहा कि यदि उन्हें कुछ और कहना होगा तो वे पहले संसद में कहेंगे.

मनमोहन सिंह ने ये भी कहा कि उनके कार्यकाल में वोटों की ख़रीद नहीं हुई है और उन्होंने राजनयिकों के संदेशों के पुष्ट होने के बारे में संदेह व्यक्त किया.

जब प्रधानमंत्री से गठबंधन धर्म के बारे में सवाल किया गया तो उनका कहना था कि उन्होंने देश के संविधान के अनुसार कर्तव्य निभाने की शपथ ली है और उनकी प्राथमिकता संविधान के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभाना होगी.

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