जनता इन आरोपों को ख़ारिज कर चुकी है: मनमोहन सिंह

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोकसभा में वर्ष 2008 के विश्वास प्रस्ताव के दौरान पैसे के कथित लेन-देन पर बयान देते हुए कहा है कि भारत की जनता इन सभी आरोपों पर चर्चा करने के बाद इन्हें सिरे से ख़ारिज कर चुकी है.

उन्होंने कहा, "मैं ये कह सकता हूँ कि कांग्रेस पार्टी या फिर सरकार की ओर से इस मामले में किसी ने भी कोई ग़ैर-क़ानूनी काम नहीं किया है.

इस विषय पर पहली बार संसद में बयान देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, "कई सदस्यों ने 14वीं लोकसभा के समय विश्वास प्रस्ताव से संबंधित कूटनीतिक संदेशों का मुद्दा उठाया था जिसके बारे में एक अख़बार में ख़बर छपी है. भारत सरकार इन कूटनीतिक संदेशों के अस्तित्व या उनके भरोसेमंद होने की पुष्टी नहीं कर सकती है.जिन लोगों के बारे में ख़बर छपी है उनमें से अनेक ने इसका खंडन कर दिया है."

इससे पहले शुक्रवार को दिल्ली में ही मीडिया ग्रुप इंडिया टु़डे के सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि वे 'ऐसी किसी भी सौदेबाज़ी का हिस्सा नहीं हैं.'

मैं किसी सौदेबाज़ी का हिस्सा नहीं: मनमोहन

उस सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा था, "मुझे ऐसी ख़रीद की कोई जानकारी नहीं है और मैं ज़ोर देकर स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैने किसी को सांसदों का वोट ख़रीदने की अनुमति नहीं दी है. सांसदों के वोट ख़रीदे जाने की किसी घटना की मुझे जानकारी नहीं है. मैं पूर्ण विश्वास से कह सकता हूँ मैं ऐसी किसी सौदेबाज़ी का हिस्सा नहीं हूँ."

राज्यसभा में भी इस मुद्दे को लेकर हंगामा हुआ जिसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई.

इस दौरान विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने सदन के समक्ष सवाल रखा कि ऐसी कौन सी परंपरा है जिसके तहत प्रधानमंत्री विपक्ष के सवालों का जवाब देना नहीं चाहते.

'कांग्रेस या सरकार ने कुछ भी ग़ैर-क़ानूनी नहीं किया'

इससे पहले प्रधानमंत्री ने लोकसभा में कहा कि सरकार इन सब आरोपों का पूरी तरह से खंडन करती है.

मनमोहन सिंह ने कहा, "चौदवीं लोकसभा में भी रिश्वत का मुद्दा उठा था और उसकी जाँच एक समिति ने की थी. समिति ने पाया था कि इस बारे में आगे कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं.लेकिन मुझे ये देखकर निराशा हुई है कि विपक्ष भूल गया है कि उसके बाद क्या हुआ था. उसके बाद हुए आम चुनावों में प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और वामदलों के सांसदों की गिनती घटी थी जबकि कांग्रेस के सांसदों की संख्या 145 से बढ़कर 206 हो गई थी."

प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा, "ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष उन आरोपों को उठा रहा है जिन्हें भारत की जनता चर्चा के बाद सिरे से ख़ारिज कर चुकी है. मैं ये कह सकता हूँ कि कांग्रेस पार्टी या फिर सरकार की ओर से किसी ने कोई ग़ैर-क़ानूनी काम नहीं किया है."

प्रधानमंत्री ने कहा, "मुझे ऐसी ख़रीद की कोई जानकारी नहीं है और मैं ज़ोर देकर स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैने किसी को सांसदों का वोट ख़रीदने की अनुमति नहीं दी है. सांसदों के वोट ख़रीदे जाने की किसी घटना की मुझे जानकारी नहीं है. मैं पूर्ण विश्वास से कह सकता हूँ मैं ऐसी किसी सौदेबाज़ी का हिस्सा नहीं हूँ."

विकीलीक्स पर सार्वजनिक की गई जानकारी एक अमरीकी राजनयिक के अपनी सरकार को भेजे संदेश पर आधारित है.

इस संदेश में कहा गया है कि अमरीकी दूतावास के एक राजनीतिक सलाहकार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सतीश शर्मा के एक सहायक ने रुपयों भरी दो तिजोरियाँ दिखाईं थीं और कहा था कि (विश्वास मत के दौरान) समर्थन जुटाने के लिए 50 से 60 करोड़ रुपए हैं.

गुरुवार को भी संसद में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ था और विपक्षी दलों, विशेष तौर पर भाजपा ने प्रधानमंत्री के इस्तीफ़े की मांग की थी.

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