‘भारत के परमाणु संयंत्र सुरक्षित’

  • 20 मार्च 2011
भारतीय परमाणु संयंत्र
Image caption भारत में 20 परमाणु बिजली घर हैं जिन की क्षमता 4780 मेगावाट है.

ऐसे समय में जब जापान का एक मुख्य परमाणु संयंत्र गंभीर संकट से जूझ रहा है, भारत के परमाणु ऊर्जा संगठन के अधिकारियों ने कहा है कि इस घटना से भारत की परमाणु ऊर्जा विकास योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि वो भारतीय परमाणु केंद्रों में सुरक्षा के पहलू पर ज़्यादा ध्यान देंगे और उसे बेहतर बनाने का प्रयास जारी रखेंगे.

उनका कहना था कि जापान के फुकुशीमा शहर के परमाणु ऊर्जा केंद्र में स्थिति उतनी भयंकर नहीं हैं जितना कि कुछ समाचार माध्यम बता रहे हैं.

भारत के परमाणु ऊर्जा कॉरपोरेशन के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एसके जैन ने हैदराबाद में एक पत्रकार सम्मलेन में कहा कि भारत जापान के फ़ुकुशीमा परमाणु ऊर्जा केंद्र की स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए है.

उन्होंने बताया कि जापान में परमाणु आपदा से निपटने के प्रयासों में खुद भारत का एक इंजीनियर भी शामिल है.

जापान से मिलने वाली सरकारी सूचना के आधार पर उन्होंने कहा की अब चारों परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और वहां का तापमान भी कम हो गया है.

'परमाणु ऊर्जा की ज़रुरत'

एसके जैन ने ये तक कहा कि जापान में जो कुछ हुआ वो कोई परमाणु घटना नहीं है, बल्कि ये केवल तापमान बढ़ जाने से होने वाला हाइड्रोजन विस्फोट था जिससे रिएक्टर को नहीं बल्कि उसके ढांचे को नुक़सान पहुंचा है.

जब भारत के परमाणु संयंत्र की सुरक्षा के बारे में उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा, “भारत के सभी परमाणु संयंत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं. इन रिएक्टरों का निर्माण इस तरह से किया गया है कि बेहद तीव्र भूकंप का भी उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.”

उन्होंने तर्क दिया कि भारत के परमाणु संयंत्र दो बड़ी प्राकृतिक विपदाओं - भुज के भूकंप और सुनामी से सुरक्षित सिद्ध हुए हैं.

एसके जैन ने बताया कि भारत 20 और परमाणु ऊर्जा केंद्र स्थापित करने वाला है जिसके लिए ऐसे रिएक्टर ख़रीदे जाएंगें, जो बेहद आधुनिक और सुरक्षित हों.

उन्होंने कहा, “नागासाकी और हिरोशिमा की तबाही से जूझने के बाद भी जापान में कोई भी परमाणु ऊर्जा केंद्र बंद करने की बात नहीं कर रहा है. वो इसलिए क्योंकि वह देश ऊर्जा की ज़रुरत पूरी करने के लिए परमाणु ऊर्जा पर निर्भर है. लेकिन भारत में जहाँ परमाणु ऊर्जा की बेहद ज़रुरत है, वहां लोग परमाणु केंद्रों का विरोध कर रहे हैं.”

इस समय भारत में 20 परमाणु बिजली घर हैं जिन की क्षमता 4780 मेगावाट है.

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